गद्दार --३
सब्सिडी के दान से पढ़ते
फिर गाल बजाते क्यों बेकार
देश के टुकड़े करने को हैं
ये गद्दार बिलकुल तैयार
ना झिझक लिहाज
ना होते हैं शर्मसार
खुद को समझें अक्लमंद
अक्ल पे पत्थर के अम्बार
देश की रोटी,देश का नमक
खाकर भी ,ये "नमक हराम"
विदूषक की तरह सूना चुटकुले
समझें खुद को कर्णधार
देश को दगा देने वाले
ये हैं पूरे चोर छुहार
ताली पीट रही है देखो
मूर्खों की भीड़ ,बिन सोचे ,बिन करे विचार !!
सब्सिडी के दान से पढ़ते
फिर गाल बजाते क्यों बेकार
देश के टुकड़े करने को हैं
ये गद्दार बिलकुल तैयार
ना झिझक लिहाज
ना होते हैं शर्मसार
खुद को समझें अक्लमंद
अक्ल पे पत्थर के अम्बार
देश की रोटी,देश का नमक
खाकर भी ,ये "नमक हराम"
विदूषक की तरह सूना चुटकुले
समझें खुद को कर्णधार
देश को दगा देने वाले
ये हैं पूरे चोर छुहार
ताली पीट रही है देखो
मूर्खों की भीड़ ,बिन सोचे ,बिन करे विचार !!
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