बस की दुश्वार है हर काम का आसान होना ,
आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सान होना!—-ग़ालिब
आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सान होना!—-ग़ालिब
हार आदमी की किसमत में लिखी है,
जीत केवल संयोग की बात है !—दिनकर
जीत केवल संयोग की बात है !—दिनकर
सर अपना काट के फेंक आया कुचा ऐ कातिल में,
ये बोझ था मेरी गर्दन पे सो उतर गया !मौलाना मोहम्मद हुसैन आज़ाद —–
ये बोझ था मेरी गर्दन पे सो उतर गया !मौलाना मोहम्मद हुसैन आज़ाद —–
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें