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शनिवार, 5 नवंबर 2016

Late Shri Purushottam Govind Perlekar's Sankalan !! {157}

इतना हसीं नक्श बिगाड़ा न जायेगा,
सजदा करेंगे हटके तेरे नक्शेपा से हम!

जब से देखी  हैं साकी की नशीली आँखें,
 होश उस  वक़्त से नहीं है मुझे पैमाने का!

असर इतना तो हो जाये मेरे मश्के तसव्वुर में,
तेरी तस्वीर जब खेंचू मेरी तस्वीर बन जाये!

जाहिद को अपने जोहद इबादत पे है गुरूर,
मुझको तेरे करम तेरी रहमत पे नाज़ है,
रहमत  पे तेरी मेरे गुनाहों को नाज़ है,
बाँदा हूँ जानता हूँ,तू बंदा नवाज़ है!

 अपना बनाया ,मेहरबानी आपकी ,
हम तो इस काबिल न थे पर कद्र दानी आपकी!

वो सिजदे ही क्या जिनमे पाबंदियां हों 
इबादत वो क्या जिसमे खुद्दारियां हों,
हकीकत में ज़ाहिद वही बंदगी है,
जहाँ सर झुके आस्तां झूम जाये!

मुश्किलें नेस्त के आसां न शक्द ,
मर्द बायद के परेशां न बक्द !

रंज से खुंगर हुआ इन्सान 
तो मिट जाता है गम 
मुश्किलें इतनी पड़ीं ,
के मुश्किलें आसां बन गयी!

लोग कहते हैं की आप निहायत काबिल हैं,
मैं इसी सोच में रहता हूँ के किस काबिल हूँ!

इबादत करते हैं जो लोग ज़न्नत की तमन्ना से,
इबादत तो नहीं इक तरह की तिजारत है,
 जब शुक्र नेमत में जुबां झुकती है बन्दे की 
वह सच्ची बंदगी है,इक शरीफाना इनायत है!




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