सूरज चाचू क्यूँ इतना तुम,
आग बबूला होते हो?
तुम तो कभी नहीं थे ऐसे ,
क्यूँ अंगारे बरसाते हो?
बना दिया धरती को भठ्ठी
या तंदूर जलाते हो,
हर जीवित प्राणी को मानो,
तुम भूनना चाहते हो,
ऐसा लगता है जैसे हम सबको ,
तवा फ्राई बनाते हो,
मत ढाओ सितम मत ढाओ कहर,
थोडा भी रहम न खाते हो,
जीवन दाता हो हम सब के,
जीवन कठिन बनाते हो,
तुम से निसदिन,तुम से जीवन,
सृष्टि के जनक कहाते हो,
आग बबूला होते हो?
तुम तो कभी नहीं थे ऐसे ,
क्यूँ अंगारे बरसाते हो?
बना दिया धरती को भठ्ठी
या तंदूर जलाते हो,
हर जीवित प्राणी को मानो,
तुम भूनना चाहते हो,
ऐसा लगता है जैसे हम सबको ,
तवा फ्राई बनाते हो,
मत ढाओ सितम मत ढाओ कहर,
थोडा भी रहम न खाते हो,
जीवन दाता हो हम सब के,
जीवन कठिन बनाते हो,
तुम से निसदिन,तुम से जीवन,
सृष्टि के जनक कहाते हो,
ऐसी भी क्या नाराजी है ,
क्यूँ आँखें दिखलाते हो ?
चाचू हो तो चाचू सा ही,
क्यूँ नहीं हमें दुलारते हो ???????????????????????????
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