मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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शनिवार, 12 मई 2018

Anmol Moti ---{43}

वियोग --जिस प्रकार महासागर में बहते हुए दो काष्ठ कभी परस्पर मिल जाते हैं और कुछ समय बाद एक दूसरे से बिछड़ भी जाते हैं उसी प्रकार स्त्री पुत्र परिवार और धन भी मिलकर विलग हो जाते हैं इनका वियोग अवश्यम्भावी है --कालिदास 
सभी प्रिय वस्तुओं एवं प्रियजनों से एक दिन अवश्य वियोग होगा --बुद्ध 
संयोग की सुखद आशा में वियोग की वेदना सह ली जाती है यदि ऐसा न होता तो वियोग किसी से सहा नहीं जाता --अज्ञात 
विरह प्रेम को मधुर बना देता है --हवेल 
विरोध --विरोध उत्साही व्यक्तियों को सदा ही उत्तेजित करता है बदलता नहीं है --शिलर 
बुरी बात का विरोध करना उत्साही व्यक्ति का ही काम है --अज्ञात 
एक सत्य दूसरे सत्य का कभी विरोध नहीं करता --हूकर 
प्रबल विरोध के अभाव में कोई भी सरकार टिकाऊ नहीं होती --डिजरायली 
विश्वास अविश्वास --विश्वास जीवन है अविश्वास मृत्यु --रामकृष्ण परमहंस 
बिना विश्वास के कार्य करना सतह विहीन गड्ढे में गिरना समान है--गाँधी 
केवल विश्वास ही हमारा एक ऐसा सम्बल है जो हमको अपनी मंज़िल पर पहुंचा देता है --स्वेट  मोर्डेन  
जिसे स्वयं पर विश्वास नहीं उसे ईश्वर में विश्वास नहीं हो सकता --विवेकानंद 
जिस वास्तु का अस्तित्व नहीं है उसे हम विश्वास  से उत्पन्न नहीं कर सकते --टेनिसन 
विश्वास  से बढ़ कर कोई औषधि नहीं है उपचार तो बहाना मात्र है --अज्ञात 
विश्वास  प्रेम की प्रथम सीढ़ी है--प्रेमचंद्र 
विश्वास उस पक्षी के सामान है जो सवेरा होने से पूर्व के अन्धकार में ही प्रकाश का अनुभव करके चहचहाने लगता है --टैगोर 
विश्वासघात --जो एक बार विशवास घात कर चुका है उसका फिर विश्वास न करो --शेख्सपीयर 
विश्वासघात से बचने की कोई युक्ति नहीं है --एक कहावत 
यद्यपि पहले पहल विश्वासघात बहुत सावधान होता है लेकिन उसका अंत धोखे से भरा होता है --लिवि 
विषय --विषय भोग में धन का ही सर्वनाश नहीं होता इससे कहीं अधिक बुद्धि और बल का सर्वनाश होता है --प्रेमचंद्र 
विषय के सुखों में घोर दुःख भरा है ,प्रारम्भ में वे मीठे लगते हैं लेकिन अंत में उनके कारण संताप ही होता है --रामदास 
न्याय के सामान विषय अँधा है --पास्कल 
विषयों में अत्यंत अनुरक्ति ही मन का मैल  है तथा विषयों से वैराग्य होने को ही निर्मलता कहते हैं --अज्ञात 
वीरता --वीरता क्या है ,निर्भीक और बेधड़क होकर स्वयं को बड़े से बड़े कष्ट एवं संकट का सामना करने के लिए तैयार रखना --हरिभाऊ 
वीरता मारने में नहीं मरने में हैं किसी की इज़्ज़त बचाने में है इज़्ज़त गंवाने में नहीं --गाँधी 
आत्मविश्वास से वीरता निश्चय ही सफल होती है --अज्ञात 
भय पर आत्मा की शानदार जीत ही वीरता है --एमियल 
व्यवहार  -- व्यवहार एक दर्पण है जिसमें प्रत्येक अपना प्रतिबिम्ब देख सकता है --गेटे 
दूसरों के प्रति वैसा व्यवहार कदापि मत करो जैसा तुम दूसरों से पसंद नहीं करते --कन्फ्यूशियस 
मनुष्य नियम बनाया करते हैं और स्त्रियां व्यवहार --डी  सीगर 
जो बात सिद्धांत से गलत है वह व्यवहार में कभी उचित नहीं होती -राजेंद्र प्रसाद 
व्यवहार पोशाक की भाँति ही होना चाहिए जो तंग न हो बल्कि ऐसा हो जिसमे हरकत और कसरत आसानी से हो सके --बेकन 
शंका --शंका से शंका बढ़ती है और विश्वास से विश्वास --विनोबा 
मानवीय ज्ञान शंका का उद्गम है --ग्रेवाइल 
हमारी शंकाएं विश्वासघाती  हैं और हमें उन अच्छाइयों से वंचित रखती है जिन्हे हम प्रयत्न करके प्राप्त कर लेते हैं --शेख्सपीयर 
शक्ति --शक्ति द्वारा शत्रु पर विजय प्राप्त करना अधूरी  विजय है --मिल्टन 
धैर्य और सज्जनता ही शक्ति है --लेहंट 
जिसके पास अपनी शक्ति नहीं उसे भगवान् भी शक्ति नहीं देता.शक्ति आत्मा के अंदर से आती है बाहर से नहीं --सुदर्शन 


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