मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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मंगलवार, 15 मई 2018

Anmol Moti !! {49 }

 सभी प्रकार की सावधानी में ,प्यार में  सावधानी रखना घातक नहीं है --बी रसल
अन्य व्यक्तियों के दुर्भाग्य  से सावधानी सीखना ही अधिक उचित है --साइरस 
सावधानी बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी संतान है --विस्तार ह्यूगो 
साहस --मनुष्य के सभी गुणों में साहस सबसे पहला गुण है क्योंकि यह सभी गुणों की ज़िम्मेदारी लेता है --चर्चिल 
बिना निराश हुए पराजय को सह लेना पृथ्वी पर साहस की सबसे बड़ी परीक्षा है --इंगरसोल 
साहस के अभाव में विद्या उस मोम के पुतले के समान है जो देखने में तो सुन्दर लगता है मगर किसी वस्तु का स्पर्श होते ही पिघल जाता है --गाँधी 
उचित क्या है यह जान लेना लेकिन उस पर अमल न करना सहस के अभाव का द्योतक है --कन्फ्यूशियस 
संकट में साहस से काम लेना आधी सफलता प्राप्त कर लेता है ---प्लाऊ ट्स 
सिद्धांत --बिना किसी सिद्धांत के जीवन का कोई मूल्य नहीं है --अज्ञात 
धर्म रहित जीवन सिद्धांत रहित जीवन है और सिद्धांत रहित जीवन पतवार रहित नौका के सदृश्य  है --गाँधी 
सत्य और न्याय के लिए उत्कंठा का होना सिद्धांत --हैज़लिट 
सिद्धांत अनुभव् के आधार पर ही बनते हैं --नाथजी 
सुख --जो पूर्ण है वह सुख है अपूर्ण में सुख नहीं --उपनिषद 
जो सुख आरम्भ में विष की भाँति है और अंत में अमृत की भाँति और जिसमे आत्मा और बुद्धि को शांति मिलती है वह सुख सात्विक है जो सुख आरम्भ में अमृत की भाँति और अंत में विष की भाँति वह राजस सुख है। जो सुख आरम्भ से अंत तक आत्माओं को केवल मोह निद्रा आलस्य में डाले रखता है वह तामस सुख है --गीता 
दिव्य सुख की तुलना में सांसारिक सुख धुल के सामान है --बुद्ध 
सच्चा सुख बाहर से नहीं मिलता अंदर से मिलता है --गाँधी 
सुख और आनंद ऐसे इत्र है जिन्हे जितना अधिक आप दूसरों पर छिड़केंगे उतनी ही अधिक सुगंध आपके अंदर से आएगी --एमर्सन 
सख का रहस्य त्याग करने में है --कार्नेगी 
दूसरों को किसी न किसी प्रकार का दुःख दिए बिना सांसारिक सुख प्राप्त नहीं हो सकता --हजारिभाऊ  उपाध्याय 
सुख का आधार पुण्य है और निश्चित रूप से उसका आधार सच्चाई होना चाहिए --कॉलरिज 
इस सत्य को जान लो आदमी के लिए यह जानना काफी है कि यहाँ सद्गुणशीलता ही सुख है पोप 
एक महान उद्देश्य के लिए प्रयत्न करने में स्वतः ही आनंद है सुख की अनुभूति है और कुछ प्राप्ति की मात्रा भी --नेहरू 

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