इंसान की ज़िन्दगी में होता है लोगों का हुजूम ,
हँसते खिलखिलाते लोग
ठहाके लगाते ,वक़्त बिताते लोग ,
फिर एक एक शख्स एक एक बार
मांगता है उससे उधार ,
पैसा,वक़्त,सिफारिश,या एतबार ,
यह दोस्त भी हो सकता है ,या हो सकता है रिश्तेदार
गर दिया उधार तब भी टूटता है
न दिया अगर टूटता है तब भी,
इस तरह छंटने लगती है भीड़ ,
इस तरह हर आदमी ,
उसके हाथ में दे देता है एक एक पत्थर
कहता है मारो !
मारो उस तस्वीर पर मेरी,
जो बना राखी है तुमने अपने दिल में
और फिर उसके इर्द गिर्द रह जाते हैं सिर्फ वो ,
जो खुश होते हैं ,आपस में खुशियां बाँट कर ,
तसल्ली होती है जिनके साथ ग़म बाँट कर !!
हुजूम : भीड़,एतबार : विश्वास ,तसल्ली : संतोष
हँसते खिलखिलाते लोग
ठहाके लगाते ,वक़्त बिताते लोग ,
फिर एक एक शख्स एक एक बार
मांगता है उससे उधार ,
पैसा,वक़्त,सिफारिश,या एतबार ,
यह दोस्त भी हो सकता है ,या हो सकता है रिश्तेदार
गर दिया उधार तब भी टूटता है
न दिया अगर टूटता है तब भी,
इस तरह छंटने लगती है भीड़ ,
इस तरह हर आदमी ,
उसके हाथ में दे देता है एक एक पत्थर
कहता है मारो !
मारो उस तस्वीर पर मेरी,
जो बना राखी है तुमने अपने दिल में
और फिर उसके इर्द गिर्द रह जाते हैं सिर्फ वो ,
जो खुश होते हैं ,आपस में खुशियां बाँट कर ,
तसल्ली होती है जिनके साथ ग़म बाँट कर !!
हुजूम : भीड़,एतबार : विश्वास ,तसल्ली : संतोष
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