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शुक्रवार, 18 मई 2018

Wajood Se : Kaaynaat !!

कितनी खूबसूरत है यह कायनात 
खुदा की करिश्माई इनायत है 
इसे लफ़्ज़ों में बयां करना नामुमकिन भी है 
और शायद हिमाकत है 
फिर भी कोशिश करना ,करते रहना इंसान की फितरत है 
फिर भी कोशिश करना,करते रहना इंसान की फितरत है 
ये कोहरा,ये सर्द मौसम 
ये आसमां ,ये गिरती शबनम 
पत्तों पर चमकते ये मोती और 
दूर दूर तक फैला ये सब्ज़ कालीन 
मानो दुपट्टा लहरा रही हो कोई नाज़नीन 
बारिश की रिमझिम ? आफरीन ,आफरीन 
सब्ज पहनावे में मानो 
नहा रही हो कोई नाज़नीन 
रात कितनी हसीन ?
सितारों से जड़ी ओढ़नी पहने 
शरमा  रही नई दुलहिन 
गर निकला हो माहताब 
तो शबाब लाज़वाब 
जब निकले आफताब तो खिले हर गुलाब 
खुश हो जाए हर जान ए  जहान 
हर पत्ता हर बूटा हर बागबान हर गुलिस्तान 
क्या कुछ कर पायी हूँ बयां जो कुछ होता है अयाँ 
काश लिख पाती आँखें देख पाती ज़ुबाँ !!

कायनात : प्रकृति ,फितरत:स्वभाव ,सब्ज़:हरा ,नाज़नीन : सुन्दर स्त्री ,अयाँ :प्रकट करना,माहताब:चाँद ,आफरीन : हर्ष अभ्व्यक्ति 

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