मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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शुक्रवार, 18 मई 2018

Wajood Se : Karishma !!

ए  मेरी ज़िन्दगी,
तूने क्यों इतनी देर लगाईं 
कब से इंतज़ार था तेरा 
तू अब आयी तू अब आयी,
कभी कभी बस दूर से ही,
तूने अपनी झलक दिखाई,
क्यों मेहरबाँ न हुई पहले 
क्यों बानी रही बस परछाई 
मैं भागती रही तेरे पीछे 
पर तू मेरे हाथ न आयी 
कितनी हसीं और पुरकशिश है तू 
मैं हरदम ही तुझको ललचाई 
क्यों नाराज़ रही तू मुझसे 
मैंने तो तुझसे प्रीत लगाईं 
जितना और जो भी दिया तूने 
एहसान समझ कर के अपनाई ,
तू नेमत है तू रहमत है 
तू कारसाज़,तू करिश्माई 
शिद्दत से महसूस हुई तू जब जब तू खुशियां लाई !!

मेहरबाँ : कृपा ,पुरकशिश : आकर्षक ,करिश्मा : चमत्कार ,नेमत : कृपा पूर्ण इनाम ,रहमत: प्रभु की अनुकम्पा ,कारसाज़ : चमत्कारी ,शिद्दत : बेताबी से 


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