बाद मरने के मेरे कब्र पे आये तो क्या,
कब्र पे फूल चढ़ाये तो क्या,
फातिहा पढ़ा तो क्या,मर्सिया गाया तो क्या ,
जीते जी तो न की मेरी पहचान ,
न दी तवज्जो दुनिया ने,
न मिली शोहरत ,न कोई नाम,
खो गया मेरे साथ ही मे हुनर ,
मेरे जज़्बात ,मेरे कलाम ,
अब ख़ाक में क्या ढूंढ रहे हो मेरे पैगाम ,
जाओ जाकर दुनियादारी करो ,ऐ दुनियावालों ,
मेरे लिए न बर्बाद करो कीमती वक़्त अपना ,
तुम्हे फुर्सत कहाँ ,तुम्हे तो करने हैं कई काम ,
मुझ जैसी शै तो पैदा होती है मर जाती है ,
हांसिल नहीं कर पाती जो दुनिया में कोई मकाम,
बीत जाते हैं लोग ऐसे ,बीते हुए वक़्त की तरह,
जीते हैं गुमनाम,और मर जाते हैं बेनाम !!
शोहरत : ख्याति ,कलाम : कविता,पैगाम : सन्देश ,फातिहा : कब्र पर पढ़ी जाने वाली धार्मिक ग्रन्थ की पंक्तियाँ ,मर्सिया : दुःख भरा गीत,शै : छोटी शख्सियत ,मकाम : निर्दिष्ट या लक्ष्य,गुमनाम : जिनका नाम कोई ना जाने ,बेनाम : जो विख्यात न हो
कब्र पे फूल चढ़ाये तो क्या,
फातिहा पढ़ा तो क्या,मर्सिया गाया तो क्या ,
जीते जी तो न की मेरी पहचान ,
न दी तवज्जो दुनिया ने,
न मिली शोहरत ,न कोई नाम,
खो गया मेरे साथ ही मे हुनर ,
मेरे जज़्बात ,मेरे कलाम ,
अब ख़ाक में क्या ढूंढ रहे हो मेरे पैगाम ,
जाओ जाकर दुनियादारी करो ,ऐ दुनियावालों ,
मेरे लिए न बर्बाद करो कीमती वक़्त अपना ,
तुम्हे फुर्सत कहाँ ,तुम्हे तो करने हैं कई काम ,
मुझ जैसी शै तो पैदा होती है मर जाती है ,
हांसिल नहीं कर पाती जो दुनिया में कोई मकाम,
बीत जाते हैं लोग ऐसे ,बीते हुए वक़्त की तरह,
जीते हैं गुमनाम,और मर जाते हैं बेनाम !!
शोहरत : ख्याति ,कलाम : कविता,पैगाम : सन्देश ,फातिहा : कब्र पर पढ़ी जाने वाली धार्मिक ग्रन्थ की पंक्तियाँ ,मर्सिया : दुःख भरा गीत,शै : छोटी शख्सियत ,मकाम : निर्दिष्ट या लक्ष्य,गुमनाम : जिनका नाम कोई ना जाने ,बेनाम : जो विख्यात न हो
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