मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

मंगलवार, 15 मई 2018

Wajood Se : Kaanta !!

तमाम उम्र मैं रही जिनके साथ 
वो चेहरे तो जाने पहचाने थे 
पर एक दिन अचानक अनजाने से लगे,
जिनके लिए दिया मैंने अपना वक़्त ,अपनी मेहनत 
उन्होंने निकाल फेंका अपनी ज़िन्दगी से यूँ 
ज्यों निकाल फेंकता है कोई काँटा अपने पैर से 
और पलट कर देखता भी नहीं उसे 
तमाम उम्र मैं रही सफर में, बिना मंज़िल तय किये ,
सामने दिखते साहिल को छोड़ कर,
मोड़ देती रही अपना सफीना ,
इन्ही जाने पहचाने लोगों की ओर ,
जो खुद तो खड़े थे साहिल पे ,
लेकिन तमाम उम्र कोशिशें करते रहे लगातार,
डूब जाऊं मैं मंझधार !

साहिल : किनारा ,सफीना : नाव 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik upanyas Bhoot-Adbhut!(35)

Mathuradas asked ,” What’s the time ? “ No one had have watch and there was no clock in Mathuradas’s house. So he went out to ask about the ...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!