हर दिन एक नया राज़ होता है फाश
आँखें रह जातीं हैं खुली की खुली
दांतों टेल मेरी उंगली दब जाती है
दिल और दिमाग दोनों हो जाते हैं सुन्न
रूह में सनसनी सी छा जाती है
हर दिन दिल समझाता है मुझे
दिमाग देता है नसीहत
हर दिन एक नया सबक देता है मुझे
हर दिन उलट जाती है एक नक़ाब
या उससे भी नीचे की नक़ाब
फिर भी उस शख्स का असली चेहरा
नज़र नहीं आता है मुझे
कितने लोग ?
कितने सारे लोग हैं इर्द गिर्द
सभी न जाने कितनी नक़ाबें लगाए घूम रहे हैं
बातें कर रहे हैं मोहब्बत भरी
मुस्कुरा रहे हैं
आपस में गले मिल रहे हैं
वे शायद इस दौरान
ढूँढ रहे हैं आपकी पीठ में वह नरम जगह
जहाँ हाथ में पकड़ा धारदार खंजर घोंप सकें !
खंजर : चाक़ू,नक़ाब, घूंघट ,नसीहत : सीख
आँखें रह जातीं हैं खुली की खुली
दांतों टेल मेरी उंगली दब जाती है
दिल और दिमाग दोनों हो जाते हैं सुन्न
रूह में सनसनी सी छा जाती है
हर दिन दिल समझाता है मुझे
दिमाग देता है नसीहत
हर दिन एक नया सबक देता है मुझे
हर दिन उलट जाती है एक नक़ाब
या उससे भी नीचे की नक़ाब
फिर भी उस शख्स का असली चेहरा
नज़र नहीं आता है मुझे
कितने लोग ?
कितने सारे लोग हैं इर्द गिर्द
सभी न जाने कितनी नक़ाबें लगाए घूम रहे हैं
बातें कर रहे हैं मोहब्बत भरी
मुस्कुरा रहे हैं
आपस में गले मिल रहे हैं
वे शायद इस दौरान
ढूँढ रहे हैं आपकी पीठ में वह नरम जगह
जहाँ हाथ में पकड़ा धारदार खंजर घोंप सकें !
खंजर : चाक़ू,नक़ाब, घूंघट ,नसीहत : सीख
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