हर इंसान अपने आप में मदरसा है एक ,
रोज़-बा-राज़ उसका हर ख़याल हर करतब,
आपको सबक सिखाता है एक ,
परत दर परत खुलता है हर पल
हर परत होती है हैरत अंगेज़
उसके वजूद में होते हैं इतने पेंचो ख़म उसके
वो क्या है क्या नहीं है.
बना रहता है हमेशा ये वहम
खुदा ने तो उसे पैदा किया था नेक
क्यों दिल में उसके पैदा हुआ फरेब
क्या उसने खुदा से डरना छोड़ दिया
या वह समझने लगा है खुद को खुदा एक !!
मदरसा : पाठशाला ,फरेब : धोखा,हैरतअंगेज़ : आश्चर्यजनक
रोज़-बा-राज़ उसका हर ख़याल हर करतब,
आपको सबक सिखाता है एक ,
परत दर परत खुलता है हर पल
हर परत होती है हैरत अंगेज़
उसके वजूद में होते हैं इतने पेंचो ख़म उसके
वो क्या है क्या नहीं है.
बना रहता है हमेशा ये वहम
खुदा ने तो उसे पैदा किया था नेक
क्यों दिल में उसके पैदा हुआ फरेब
क्या उसने खुदा से डरना छोड़ दिया
या वह समझने लगा है खुद को खुदा एक !!
मदरसा : पाठशाला ,फरेब : धोखा,हैरतअंगेज़ : आश्चर्यजनक
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