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रविवार, 20 मई 2018

Wajood Se : Khudi !!

अपनी ही दोस्त हूँ मैं ,
बातें किया करती हूँ खुद से 
चाहती हूँ इस खुदी को शदीद 
यही मेरी हमदम है यही हबीब 
यह मुझे कभी तनहा नहीं छोड़ती 
बड़ा ख़याल रखती है मेरा 
कभी दिल नहीं तोड़ती 
पुचकारती है आसूं भी पोंछती है
 गर मैं हो जाती हूँ ग़मगीन 
अक्सर खुशियों में इसे भूल जाती हूँ मैं 
ग़म  में ये फिर भी नहीं भूलती मुझे ,
यही तो है जो हौंसला देती रहती है 
मरते दम  तक साथ निभाएगी मेरा 
दम तोड़ देगी जब यहाँ न रहूंगी मैं !!

खुदी : स्वयं ,शदीद: बहुत ज्यादा,हबीब:प्रियजन,
तनहा:अकेला,ग़मगीन: उदास 

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