मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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सोमवार, 21 मई 2018

Wajood Se : Khwaab !!

इंतज़ार था बरसों से जिस बेनज़ीर लम्हे का ,
बस आ ही पहुंचा है मेरे दर तक,
सुनती आयी थी कि ख्वाब भी सच हुआ करते हैं 
मैंने भी देखा था एक ,पहर दर पहर तक ,
इंतज़ार करती रही सुबह से शाम और शाम से सहर तक ,
पहले सुनी आहट ,अब पड़ने लगी है दस्तक 
रहना चाहती हूँ होशमंद ,रख लेना चाहती हूँ ,
इसे आँखों में ,दिल में ,महफूज़ ,
खो न जाए कहीं पड  न जाए कोई खलल ,
होने को इसके असर तक !

बेनज़ीर : अतुलनीय,ख्वाब:सपना,सहर: सुबह,पहर दर पहर : चार घंटों तक का एक प्रहार होता है ,दस्तक:खटखटाहट ,होशमंद: होश में,महफूज़ : सुरक्षित ,खलल : विघ्न 

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