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सोमवार, 21 मई 2018

Wajood Se : Mahfil !!

आये थे तेरी महफ़िल में ,
कुछ सुनने सुनाने को हम,
सारा वक़्त बैठे रहे सहमे हुए 
इस ज़माने से हम
 तू रहा मसरूफ ,गैरों से घिरा,
बस बैठे रहे बेगाने से हम ,
शोर शराबे से जवां  रही तेरी महफ़िल 
बेआवाज़ खामोश तराने थे हम 
रोशन हो रहे थे सबकी उम्मीदों के चराग ,
जल रहे थे बस परवाने से हम ,
सब जी रहे थे ज़िन्दगी पुरसुकून ,
बेचैन रहे दीवाने से हम ,
ख्वाब सबके हुए हक़ीक़त में तब्दील ,
रह गए एक बेनूर अफ़साने से हम 
सभी जानते थे तलाश अपनी अपनी 
लापता रहे बेठिकाने से हम !

तब्दील : परिवर्तित,मसरूफ : व्यस्त ,पुरसुकून :शांतिपूर्ण 

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