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मंगलवार, 22 मई 2018

Wajood Se : Meharbaani !!

आये थे तेरी महफ़िल में बड़ी शान से हम ,
रुखसत हो रहे हैं बदनाम से हम 
तुझको माना था मोहसिन ,
बहुत की ,तेरी खिदमत ,
सोचा था बहुत दूर तक ,
साथ चलेंगे हम ,
तेरी मेहरबानियों का क़र्ज़ 
चुकाते रहे हरदम 
जितना तू काम आया हमारे ,
उतने ही तेरे काम आये हम 
यक ब यक तूने कर लिया किनारा 
तो बहुत हैरान हुए हम 
गर तूने समझा था इसे सौदा 
तो बराबरी का रहा हिसाब 
न फायदा तुझे हुआ,न घाटे में रहे हम ,
सोचेंगे शायद यही हो  मुकद्दर में लिखा हुआ ,
कोई शिकवा न शिकायत करेंगे हम 
तू हमेशा बनाये रखता है भरम 
बस ऐसी ही कोई तदबीर ,करते रहेंगे हम ,
राहें जुदा,ज़िन्दगी जुदा ,
 तरीके जुदा ,फलसफे जुदा ,
शायद ही कभी एक राह पे 
चल पाएंगे हम !!

रुखसत :विदा ,महफ़िल :सभा,मुकद्दर: : किस्मत,शिकवा : उलाहना,तदबीर; प्रयत्न,फलसफा : दर्शन ,मोहसीन : एहसान करनेवाला ,खिदमत : सेवा 

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