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मंगलवार, 22 मई 2018

Wajood Se : Maut !!

भूला रहता है इंसान जानबूझ कर ,
कभी भूले से भी इसका ख़याल लाता  नहीं,
गर कोई मौत के कगार पर हो 
तो सैंकड़ों नुस्खे सुझाएगा ,
गोया वे हकीम लुकमान से कम नहीं ,और उनके नुस्खे ,
खींच लाएंगे उसे ,मौत के मुंह से बाहर 
लेकिन जब उसे मौत आ ही जायेगी 
तो कोई परहेज़ नहीं है चर्चों से 
बाकायदा बहस मुबाहिसा भी कर लेंगे 
जिरह भी कर लेंगे 
मरने वाले के तारीफों के पल बांधेंगे 
दिली अफ़सोस जताएंगे 
और शफ़्फ़ाफ़ कपडे पहन 
होंगे जनाज़े में उसके शरीक 
आपस में गुफ्तगू भी करेंगे ,
मुंह छुपा कर मुस्कुरा भी लेंगे 
गोया जनाज़े में नहीं किसी बारात में हों शामिल 
उसके जिस्म को खाक होता देखेंगे ,
या होते हुए जमींदोज़ 
पर असर न लेंगे कुछ 
रस्मे दस्तूर निभा कर चल देंगे 
फिर दुनिया की ओर 
हो जाएंगे मसरूफ रोज़मर्रा के सिलसिलों में 
भूल जाएंगे मौत,या ग़र्क कर देंगे उसका ख़याल 
दिमाग के किसी अंधे तहखाने में!!

गुफ्तगू : वार्तालाप,ज़मींदोज़ :दफ़्न होना ,दस्तूर: प्रथा,ग़र्क :डूबना   

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