मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

बुधवार, 23 मई 2018

Wajood Se : Musafir !!

क्या है ज़िन्दगी ?
अपनी अपनी गाडी का इंतज़ार करती  
मुसाफिर खाने में जुटी भीड़ ?
सबके पास होते हैं अलग अलग माल असबाब ,
शायद ही कोई किसी से बातें करता 
या नज़दीकियां बढ़ाने की कोशिश करता नज़र आता है 
अपने आप में मशगूल 
खाने पीने के इंतज़ाम में मसरूफ 
कोई बैठे बैठे झपकी मारता कि चोरी न हो जाए असबाब 
कोई फटी चादर बिछा कर खर्राटें भी मार लेता है 
जिसकी गाडी आयी ,वह उठ कर चल देता है 
और उसी गाडी से कोई मुसाफिर उतर कर 
मुसाफिरखाने में उसी जगह आकर बिछा देता है अपना असबाब 
जहाँ से अभी अभी पिछला मुसाफिर गया है !

मुसाफिरखाना : मुसाफिरों के लिए गाडी आने तक प्रतीक्षा करने के लिए बना कमरा,असबाब :सफर में ले जाने वाला सामान ,मशगूल : बातचीत में व्यस्त ,मसरूफ : किसी कार्य में व्यस्त 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik upanyas Bhoot-Adbhut!(33)

Mathuradas started speaking , “ I was very small but I am blessed with photogenic memory and so I guarantee that word to word which I have n...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!