आती है मुझको हंसी।,
दुनिया की नादानी पे,
जितने परदे जितने नक़ाब पहन कर ,
खुद को छुपाने की कोशिश करती है ये ,
उतनी ही उघाड़ उघाड़ जाती है ये ,
हर झूठ को सच के मुलम्मे में पेश करती है ये ,
झूठ का एक बड़ा सा पुलिंदा नज़र आती है ये ,
अपनी बेरहमी पर,रहम का लिबास चढ़ती है ये ,
अपनी खोखली शख्सियत पर ,बेमानी हंसी चिपकाती है ये ,
तल्ख़ रकाबत को मोहब्बत की चाशनी में घोलती है ये ,
दिखती है कुछ और ,
दरअसल होती है कुछ और ये !!
मुलम्मा:आवरण,पुलिंदा:बड़ा सा ढेर,नक़ाब : घूँघट ,बेरहमी : क्रूरता ,रहम:दया,शख्सियत : व्यक्तित्व ,बेमानी : निरर्थक ,तल्ख़ रकाबत :कटुता भरी शत्रुता
दुनिया की नादानी पे,
जितने परदे जितने नक़ाब पहन कर ,
खुद को छुपाने की कोशिश करती है ये ,
उतनी ही उघाड़ उघाड़ जाती है ये ,
हर झूठ को सच के मुलम्मे में पेश करती है ये ,
झूठ का एक बड़ा सा पुलिंदा नज़र आती है ये ,
अपनी बेरहमी पर,रहम का लिबास चढ़ती है ये ,
अपनी खोखली शख्सियत पर ,बेमानी हंसी चिपकाती है ये ,
तल्ख़ रकाबत को मोहब्बत की चाशनी में घोलती है ये ,
दिखती है कुछ और ,
दरअसल होती है कुछ और ये !!
मुलम्मा:आवरण,पुलिंदा:बड़ा सा ढेर,नक़ाब : घूँघट ,बेरहमी : क्रूरता ,रहम:दया,शख्सियत : व्यक्तित्व ,बेमानी : निरर्थक ,तल्ख़ रकाबत :कटुता भरी शत्रुता
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