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शनिवार, 26 मई 2018

Wajood Se : Registan !!

मुसीबतें तपते रेगिस्तान सी ,
दूर दूर तक फैली ,
जब  घिरा होता है इनसे इंसान ,
दूर दूर तक कोई छोर नहीं दिखता 
तपती रेत ,जलते पैर,और सर पर सूरज ,
कितना बेचैन हो जाता है इंसान ,
लेकिन चलता रहता है चलता ही रहता है ,
चलना ही उसकी किस्मत है 
और कोई चारा भी तो नहीं होता 
यही हौंसला ,यही हिम्मत ,यही मेहनत 
रंग लाती है एक दिन ,
और बरसती है ख़ुशी ,बारिश की बूंदों की तरह ,
भिगो देती है उसका तन मन जीवन 
सपनों के बीज पौधे बनकर लहलहाते हैं 
कामयाबी के फूलों की खुशबू से महकने लगता है 
उसकी ज़िन्दगी का गुलिस्तान 
,इसी तरह हिम्मत के पेड़ों पे लगते हैं ,
कामयाबी के फूल !! 

हौंसला : हिम्मत,कामयाबी के फूल : सफलता की ख़ुशी,गुलिस्तान : बगीचा 

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