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शनिवार, 26 मई 2018

Wajood Se : Sabak !!

शरीफों को यह दुनिया सिखाती है 
हर दिन एक नया सबक ,
हर दिन देती है एक नई  नसीहत 
कोई न कोई हर दिन उठाता है आप पर उंगलियां 
चाहे उसका कोई भी हो न हो सबब 
हर दिन किसी न किसी को ता उम्र 
देनी पड़ती है सफाई 
या देनी पड़ती रहती है 
किसी न किसी की हर वक़्त दुहाई 
इसी शक ओ  शुबहे में जीता है शरीफ 
कहीं दागदार न हो जाए दामन 
छूट न जाए रोज़ी,रूठ  न जाए अज़ीज़ 
तमाम उम्र ढूंढता ही रहता है वह 
सबको खुश रखने की तजवीज़ 
इन्ही कोशिशों में जी नहीं पाता 
बस जीने की रस्म अदा करता है शरीफ !!

नसीहत:सीख,सबब: उद्देश्य ,ता उम्र:सारी  उम्र ,शक-ओ -शुबहा : आशंक कुशंका,अज़ीज़:अपना प्रिय,तजवीज़ : कार्य रूप में लाई  जाने वाली तरकीब या सलाह,रस्म अदा करना : औपचारिकता निभाना 

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