शरीफों को यह दुनिया सिखाती है
हर दिन एक नया सबक ,
हर दिन देती है एक नई नसीहत
कोई न कोई हर दिन उठाता है आप पर उंगलियां
चाहे उसका कोई भी हो न हो सबब
हर दिन किसी न किसी को ता उम्र
देनी पड़ती है सफाई
या देनी पड़ती रहती है
किसी न किसी की हर वक़्त दुहाई
इसी शक ओ शुबहे में जीता है शरीफ
कहीं दागदार न हो जाए दामन
छूट न जाए रोज़ी,रूठ न जाए अज़ीज़
तमाम उम्र ढूंढता ही रहता है वह
सबको खुश रखने की तजवीज़
इन्ही कोशिशों में जी नहीं पाता
बस जीने की रस्म अदा करता है शरीफ !!
नसीहत:सीख,सबब: उद्देश्य ,ता उम्र:सारी उम्र ,शक-ओ -शुबहा : आशंक कुशंका,अज़ीज़:अपना प्रिय,तजवीज़ : कार्य रूप में लाई जाने वाली तरकीब या सलाह,रस्म अदा करना : औपचारिकता निभाना
हर दिन एक नया सबक ,
हर दिन देती है एक नई नसीहत
कोई न कोई हर दिन उठाता है आप पर उंगलियां
चाहे उसका कोई भी हो न हो सबब
हर दिन किसी न किसी को ता उम्र
देनी पड़ती है सफाई
या देनी पड़ती रहती है
किसी न किसी की हर वक़्त दुहाई
इसी शक ओ शुबहे में जीता है शरीफ
कहीं दागदार न हो जाए दामन
छूट न जाए रोज़ी,रूठ न जाए अज़ीज़
तमाम उम्र ढूंढता ही रहता है वह
सबको खुश रखने की तजवीज़
इन्ही कोशिशों में जी नहीं पाता
बस जीने की रस्म अदा करता है शरीफ !!
नसीहत:सीख,सबब: उद्देश्य ,ता उम्र:सारी उम्र ,शक-ओ -शुबहा : आशंक कुशंका,अज़ीज़:अपना प्रिय,तजवीज़ : कार्य रूप में लाई जाने वाली तरकीब या सलाह,रस्म अदा करना : औपचारिकता निभाना
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें