जलती रही शमा रात भर ,
रोशन करती रही सारा घर,
पिघलती रही ख़ामोशी से जलकर ,
अश्क पीकर आग पीकर ,
उजाले बांटती रही घर घर,
कभी हवाओं से गई फहर ,
कभी कड़ी रही ठहर ठहर
जली पहर दर पहर
जब तलाक ना हुई सहर ,
अंधेरों में रही दर दर !!
अश्क:आंसूं ,पहर:समय के चौबीस घंटों का आठंवा हिस्सा,दर दर : हर दरवाज़े पर,शमा : मोमबत्ती की लौ
रोशन करती रही सारा घर,
पिघलती रही ख़ामोशी से जलकर ,
अश्क पीकर आग पीकर ,
उजाले बांटती रही घर घर,
कभी हवाओं से गई फहर ,
कभी कड़ी रही ठहर ठहर
जली पहर दर पहर
जब तलाक ना हुई सहर ,
अंधेरों में रही दर दर !!
अश्क:आंसूं ,पहर:समय के चौबीस घंटों का आठंवा हिस्सा,दर दर : हर दरवाज़े पर,शमा : मोमबत्ती की लौ
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