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सोमवार, 28 मई 2018

Wajood Se : Siyasat !! {148} Siyasat !! Written in 2003 & Published in 2005

एक शतरंज का खेल है सियासत ,
हर सियासतदां ,है खिलाडी,
छुपती नहीं है जिसकी ,शान ओ  शौकत ,
आईने हैं सभी ,एक दूसरे के,
लगाते रहते हैं  आपस में फ़िज़ूल की तोहमत,
करते हैं खिलाफत ,दिखाते हैं रकाबत,
कई कई नक़ाबों से ढके होते हैं चेहरे ,
जब उलटती है नक़ाब तो होती है हैरत ,
सौदागर हैं ये नायाब ,
लूटते रहते हैं मुल्क की दौलत ,
कोई मायने नहीं रखती इनको 
गरीब की मुश्किल ,शहीद की शहादत ,
क्यूंकि अवाम की रिआया ही तो है मोहरें ,
जिन्हे वे बनाए  रखते हैं अलामत ,
ताकीखेल चलता रहे सही सलामत !!

सियासत:राजनीति,सियासतदां :राजनीतिज्ञ,तोहमत:आक्षेप,
रकाबत:दुश्मनी ,खिलाफत : विरोध,हैरत : आश्चर्य,अवाम की रिआया : देश की जनता,अलामत: दुर्भाग्य,सलामत:निर्विघ्न रूप से ,नायाब:जिसकी तुलना न की जा सके 

{ प्रकाशित : अक्टूबर 2005 {मज़मून }  

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