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बुधवार, 11 मार्च 2020

Dharavahik Upanyas --Anhoni ---{44}

आगे पूरा दिन गंभीरता पूर्वक पढाई में बीत गया ,और नई बात यह थी कि ,यूनिवर्सिटी की ओर से परीक्षाओं का टाइम टेबल और रोल नंबर्स दोनों ही आ गए थे। उन्हें परीक्षा के  अलग अलग सेंटर्स मिले थे जिला महाविद्यालय और जिला महिला महा विद्यालय और परीक्षा बीच बीच के अंतराल मिलकर परीक्षाओं की अवधि कुल पंद्रह दिन थी। सभी को दो तीन प्राइवेट होस्टल्स के पते भी दे दिए गए थे ,जहाँ भोजन आवास किफायती दर पर उपलब्ध था। चूँकि जाने और आने की समयावधि पांच घंटे थी और यह कदापि संभव न था कि ,प्रतिदिन जाकर परीक्षा दी जाय और वापस घर लौट कर आया जाय। सभी ने जाकर अपने अपने माता पिता को बताया ,विचार विमर्श किया गया और अगले रविवार को शहर जाकर हॉस्टल के बारे में अंतिम निर्णय लेना  तय किया। 
कमलेश्वर ने रात पापा को बताया ,उन्हें टाइम टेबल और रोल नंबर भी दिखाया ,पहले तो उनकी त्योरियां चढ़ गईं ,फिर कुछ सोचते हुए से बोले कि ,मेरे एक मित्र रहते हैं वहां भारत सिंह शेखावत ,मैं उनसे बात कर आऊंगा रविवार को वहीँ जाकर रहना पंद्रह दिनों तक। "और सिर्फ पढाई ही करना"उन्होंने जरा सख्ती से कहा ," मैं सारी खबर रखूँगा "वे बोले "एक पर्चे पर तारीखें लिख कर दे दो " कमलेश्वर अपने कमरे में निकल गया ,और दस मिनिट बाद उन्हें विस्तृत जानकारी वाला एक परचा देकर चला गया। उधर जब अंजुरी ने यह बात मम्मी पापा को बताई तो पापा ने कहा कि वे उसके रहने की व्यवस्था डाक बंगले में करवा देंगे और मम्मी भी उसके साथ जाएँगी,यहाँ मुझे कोई परेशानी नहीं होगी,उनके पास काफी नौकर चाकर थे।    
अगले पंद्रह दिन खूब धुंआधार पढाई हुई ,सभी प्रोफेसर्स ने अपने अपने सिलेबस पूरे किये।  सभी छात्र छात्राएं बस पढाई कर रहे थे ,पढाई की बातें कर रहे थे या लाइब्रेरी से किताबें इशू कर रहे थे और उनके आदान प्रदान भी कर रहे थे। कमलेश्वर और अंजुरी भी कर रहे थे। साथ ही छोटे छोटे  पर्चों में दोनों ने ही अपने ठहरने की व्यवस्था बता दी। दोनों की परीक्षा भी अलग अलग सेंटर्स पर थीं और रहने की व्यवस्था भी अलग अलग ही थी और दोनों ही इस समय पूरा ध्यान पढाई पर केंद्रित करना चाह रहे थे ---क्रमशः 

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