मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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रविवार, 15 मार्च 2020

Dharavahik Upanyas ---Anhoni ---{50}

दोनों ही तेजी से सीढ़ियां चढ़ते टेकरी पर पहुंचे थे। देवी माँ के दर्शन के बाद अपनी पुरानी  जगह आ बैठे थे, एक दूसरे को देखते रहे ,अंजुरी ने कमल का हाथ थाम लिया ,कमल बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं को संयत रख सका,बसअस्फुट से स्वर में बोला ,मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता, तुम नहीं थी तो वीरान सा लगता था सब ओर। चलो मैं आ गई हूँ ना अब ! अंजुरी ने स्नेहसिक्त स्वर में कहा। "खाना खाओगे ? हाँ ! अचानक ज़ोर से भूख लग आयी है।  क्या लाई हो ? "तुम्हारी पसंद के आलू और परांठे "दोनों ने हाथ धोये और धीरे धीरे बातें करते हुए खाना खाने लगे। "पापा कुछ और बोले ? सहसा अंजुरी ने पूछ लिया ,हाँ परीक्षा देने से पहले ही बोले थे कि तुमसे बात ना करूँ ,और यह कि उनकी नज़र बनी रहेगी मुझ पर। "तुम क्या सोचते हो ? कमल को इस प्रश्न की अपेक्षा नहीं थी,वह बस अंजू को देखता रहा।  अंजू को यह बहुत ही आश्चर्य जनक लगता था कि जब कमल उससे इतना प्रेम करता है ,तो वह पिता का सामना करने के बारे में क्यों नहीं सोचता। "तुम क्या करोगी ? " मैं ? अगर तुम मेरा साथ दोगे तो मैं सारी  दुनिया से तुम्हारे लिए लड़ जाऊँगी।  कमल ने अंजुरी की आँखों में आत्म विश्वास की चमक देख रहा था। उसे लगा कि अंजुरी की हिम्मत के आगे वह बहुत बौना है। उसने गहरी सांस ली। जैसे ही पिता का चेहरा उसके मानस पटल पर आता वह डर से सफ़ेद पड़  जाता।  वह अपने आप से जब भी प्रश्न करता ,कि अंजुरी और उसके बीच का यह प्रेम सम्बन्ध आगे किस प्रकार बढ़ेगा ? तो उसे कोई उत्तर नहीं मिलता ,वह बचपन से ही अपनी माँ के समीप रहा ,अपनी सारी स्कूल की बातें पढाई की बातें मित्रों की बातें वो माँ को ही बताता रहा। पिता ,एक तो अपने कार्य में आरम्भ से ही अति व्यस्त रहे और दूसरे माँ के जाने के बाद अचानक ही उसके सम्पूर्ण अभिभावक बन गए। कठोर अनुशासक ,परम्पराओं के वाहक और अपनी प्रतिष्ठा के प्रति अत्यंत जागरूक पिता। उन्होंने कभी कमलेश्वर के कोमल मन को ना छूआ ,वह मन जो माँ के जाने के बाद अत्यधिक आहत था ,उसी समय अंजुरी उसके जीवन में आ गई ,प्रेम से सराबोर, उसपर तनमन से न्योछावर। "क्या सोच रहे हो ? कुछ नहीं। अनमना सा वह बोला।  अंजुरी घड़ी देखती हुई बोली देर हो गई है चलो। दोनों उठ खड़े हुए। अंजुरी उससे लिपट गई ,और तुरंत ही अलग होते हुए बोली ,तुम इधर से ही निकल जाना ,मैं चली जाउंगी। दोनों सीढ़ियां उतर कर एक दूसरे की ओर हाथ हिलाते हुए ,विपरीत दिशा में चल दिए। ---क्रमशः------

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