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मंगलवार, 17 मार्च 2020

Dharavahik Upanyas ---Anhoni----(51)

अंजुरी और कमलेश्वर दोनों ही असमंजस की मनःस्थिति में थे। उनकी कल्पना ,उनकी भावना ,उनका एक दूसरे के प्रति अपनत्व और प्रेम, तराज़ू के एक पलड़े में था और दूसरे में यह कठोर सच्चाई कि कमलेश्वर के पिता अपनी मान मर्यादा प्रतिष्ठा परंपरा कुछ भी नहीं छोड़ेंगे, अंजुरी को स्वयं पता नहीं था कि उसके अभिभावक इस विषय पर किस प्रकार प्रतिक्रिया करेंगे। इसी उहापोह में वह कभी कमल को अपने बहुत समीप और कभी स्वयं से बहुत दूर पाती। उस मनःस्थिति में उसका व्यवहार न तो कमल को समझ में आता और ना ही स्वयं वह भी समझ पाती। वह कभी सभी के समूह में भी बैठी भी उदास सी रहती और कभी बहुत चहकती थी।  कमलेश्वर उसकी मनःस्थिति को अच्छी तरह समझता था ,लेकिन उसे समझ में नहीं आता था कि वह किस प्रकार अंजुरी को आश्वस्त कर सके। 
नयी  कक्षाएं आरम्भ हो चुकीं थीं।  व्यवस्थित रूप से पढाई भी। अंजुरी और कमलेश्वर दोनों का ही किताबें इशू करना और  एक्सचेंज करना नोट्स बनाना और घर में भी पढाई करना जारी था। कमलेश्वर ने देखा कि लगभग दो महीनो से अंजुरी उसकी ओर ज़रा भी अपनत्व नहीं दर्शा रही थी जबकि वह उसे अपने हृदय के अत्यंत समीप ही पाता था।  पापा भी अपने ज़मीनों के काम में कुछ ज्यादा ही व्यस्त थे और कई दिनों से उनका कोई कठोर प्रवचन सुनने को नहीं मिला था। 
इसी बीच एक दिन जो शुक्रवार का दिन था ,सभी ने क्लास में सिंधु वर्गीस मैडम को इस बात के लिए तैयार कर लिया कि इस रविवार को कहीं पिकनिक पर चला जाय। पांच किलोमीटर की दूरी पर एक सुन्दर सा स्थान था जहाँ थोड़ा घने पेड़ों का साया था। वह घाना जंगल न था और वहां लोग अक्सर पिकनिक मनाने आते, मज़ेदार बात ये थी कि उस स्थान विशेष के मैनेजमेंट ने वहां एक पक्का मकान सा बना रखा था और ,वहां कर्मचारी रहते और दस से पचास लोगों तक के खाना पकाने के सामान उपलब्ध कराते। अंजुरी बहुत प्रसन्न थी। उसे इस तरह के कार्यक्रम और सामूहिकता बहुत  पसंद थी। 
वे सभी प्रतीक्षा कर रहे थे ,प्राचार्य महोदय के ऑफिस के बाहर,तभी सिंधु मैडम गंभीर सा चेहरा लिए आईं,सभी उदास हो गए ,तभी सिंधु मैडम बोली ,"हाँ बोल दिया है "सभी छात्र छात्राएं अत्यंत हर्षित हो कर बड़ी मुश्किल से अपनी किलकारी रोक पाए। सिंधु मैडम ने कहा,सभी अपने अपने पेरेंट्स से अनुमति पत्र कल ले आएंगे  ,"कल मैं  कुछ ज़रूरी बातें बताऊगी "---क्रमशः -------

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