मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

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गुरुवार, 19 मार्च 2020

Dharavahik Upanyas ---Anhoni ---{52}

कमलेश्वर सोच में पड़  गया क्या पापा उसे अनुमति देंगे ? घर जाकर उसने एक अनुमति पत्र लिख कर तैयार कर लिया था। उसे मौका देख कर उनसे साईन करवाना था। दूसरे दिन सुबह वह जल्दी तैयार हो गया और नाश्ते की टेबल पर पहुँच गया। पापा ने नाश्ता कर लेने पर वाश बेसिन में हाथ धोते धोते उससे पूछा "कैसी चल रही है पढाई ? जी अच्छी चल रही है। { इससे पहले प्रथम आने पर उन्होंने उसे बधाई दी थी बस } किताबें खरीदनी हैं पापा, फीस तो कल जमा करा दी थी , शहर जाकर किताबे ले आऊं ? हाँ हाँ ले आओ, हाथ पोंछ कर उन्होंने कहा "लो ये रुपये रखो उन्होंने जेब से नोटों की गड्डी  सी निकाल कर उसे दे दी। तभी उन्हें ज़मीनो का काम सम्हालने वाले भेरू सिंह ने  बाहर से आवाज़ दी ,कमलेश्वर ने जल्दी से अनुमति पत्र निकाला और पेन उनके हाथ में देते हुए कहा ,"पापा ! इस पर साईन चाहिए थे। "तभी बाहर खड़े भेरू सिंह  ने दोबारा आवाज लगाईं। पापा ने जल्दी से पेन लेकर साईन कर दिए ,और झपटते हुए बाहर निकल गए।  उसका दिल बल्लियों उछलने लगा था।  उसने भी फोल्डर उठाया साइकिल के केरियर में फंसाया और निकल गया। 
लगभग सभी छात्र छात्राएं अनुमति पत्र ले आये थे और सभी ने उसे सिंधु मैडम के पास जमा करवा दिया था। असेंबली हॉल में ही सुबह प्राचार्य महोदय ने घोषित किया कि सभी सुबह साढ़े आठ बजे  महाविद्यालय पहुँच जाएँ ,यहीं से सिंधु मैडम आशा शर्मा मैडम और प्रोफ़ेसर दिनश प्रधान आप लोगों के साथ जायेंगे। आगे की जानकारी सिंधु मैडम देंगी। सिंधु मैडम ने कहा कि सभी लोग अपने अपने लंच बॉक्सेस और वॉटर बॉटल्स ले आएंगे। जो भी अपनी अपनी कोई कला प्रस्तुत करना चाहता है फ्लूट ,माउथ ऑर्गन वगैरह ले आएगा। हम नौ बजे महाविद्यालय से चल देंगे लगभग एक घंटा पैदल चलना होगा। शाम चार बजे हम वहां से वापस चल देंगे। सभी को अपने आप घर जाना होगा। सभी ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गए। और मीटिंग समाप्त हो गई। बाकि की क्लासेज समाप्त होने पर सभी  से  तेजी से घर की ओर चल दिए। ----क्रमशः -----

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