हँसते खिलखिलाते सभी पिकनिक स्पॉट पर पहुँच गए। घने पेड़ों के साये और तरह तरह की चिड़ियों की आवाज़ें उस नीरवता में मनमोहक लग रहीं थीं। छात्र छात्राओं का शोरगुल भी कुछ कुछ उस चहचहाहट सा ही लग रहा था। सब ने पहले जाकर वहां निर्मित भवन में जाकर कर्मचारी के रजिस्टर में एंट्री की ,सदस्यों की संख्या लिखवा दी और फिर अपनी पसंदीदा जगह पर सभी के द्वारा लाई गई दरियों को बिछा दिया। तब तक रामदयाल भी केंटीन से बनवा कर कुछ खाने की गरम गरम स्वादिष्ट चीजें ले आया ,वह साइकिल से आ गया था। उसने सभी को दोनों में परोस दिया। सबने नाश्ता कर लिया क्यूंकि सभी पांच किलोमीटर चल कर थक गए थे इसलिए भूख भी लगी थी।
तब तक छात्र छात्राओं ने अंत्याक्षरी का कार्यक्रम आरम्भ कर दिया। तीनो प्रोफेसर्स भी इसमें शामिल हो गए। सभी लड़कियां एक ओर तथा दूसरी ओर सभी लडके थे। धीरे धीरे इस प्रतियोगिता में सभी को आनंद आने लगा ,और दोनों ही ग्रुप्स अपने अपने ग्रुप की विजय के लिए पूरे जोश के साथ सहयोग कर रहे थे। महेश चौहान भी अपना माउथ ऑर्गन ले आया था ,उसने सभी की फरमाइश पर पांच गाने बजाये ,और उसके बाद शिवम् राठी ने भी पांच गाने गाये। तब तक दोपहर उतर आयी थी। अब सभी को प्रोफेसर्स ने खाना खा लेने को कहा। सभी दरियों पर गोल घेरा बना कर बैठ गए। सभी ने अपने अपने लंच बॉक्सेस निकाल लिए और अखबारों के टुकड़ों पर उन्हें सर्व कर कर के सभी को देना आरम्भ किया। अंजुरी ने अपने पास बैठे कमल का खाना भी उसके टिफिन से लेकर अधिकार पूर्ण रूप से उसी अखबार पर बांटा। कमलेश्वर को यह इतना अच्छा लगा की वह मन ही मन इस अपनत्व से अभिभूत हो गया। उसे यह आभास हुआ कि वह और अंजुरी दो नहीं एक ही हैं।
खाने के बाद कई लोग सुस्ती महसूस करने लगे ,और कुछ अपने अपने ग्रुप में मैडम से अनुमति लेकर आस पास घूमने लगे। अंजुरी,कैलाश प्रभा और कमलेश्वर भी निकल पड़े। कैलाश और प्रभा आगे निकल गए और अंजुरी कमलेश्वर को ऊपर पेड़ पर कोई विशेष चिड़िया दिखाने लगी --कहाँ ? कहाँ ? करता कमल पंजों के बल खड़ा होकर देखने की कोशिश कर रहा था ,जब अंजुरी खिलखिलाती हुई एक ओर भागी ---कमलेश्वर समझ गया कि वह उसे झूठ बोल रही थी --वह भी उसके पीछे भागा --उसे अंजुरी तक पहुँचते देर नहीं लगी --उसने जाकर उसे पीछे से जकड लिया --अंजुरी ने ज़रा भी विरोध नहीं किया --वह घूम कर उससे लिपट गई ---क्रमशः -------
तब तक छात्र छात्राओं ने अंत्याक्षरी का कार्यक्रम आरम्भ कर दिया। तीनो प्रोफेसर्स भी इसमें शामिल हो गए। सभी लड़कियां एक ओर तथा दूसरी ओर सभी लडके थे। धीरे धीरे इस प्रतियोगिता में सभी को आनंद आने लगा ,और दोनों ही ग्रुप्स अपने अपने ग्रुप की विजय के लिए पूरे जोश के साथ सहयोग कर रहे थे। महेश चौहान भी अपना माउथ ऑर्गन ले आया था ,उसने सभी की फरमाइश पर पांच गाने बजाये ,और उसके बाद शिवम् राठी ने भी पांच गाने गाये। तब तक दोपहर उतर आयी थी। अब सभी को प्रोफेसर्स ने खाना खा लेने को कहा। सभी दरियों पर गोल घेरा बना कर बैठ गए। सभी ने अपने अपने लंच बॉक्सेस निकाल लिए और अखबारों के टुकड़ों पर उन्हें सर्व कर कर के सभी को देना आरम्भ किया। अंजुरी ने अपने पास बैठे कमल का खाना भी उसके टिफिन से लेकर अधिकार पूर्ण रूप से उसी अखबार पर बांटा। कमलेश्वर को यह इतना अच्छा लगा की वह मन ही मन इस अपनत्व से अभिभूत हो गया। उसे यह आभास हुआ कि वह और अंजुरी दो नहीं एक ही हैं।
खाने के बाद कई लोग सुस्ती महसूस करने लगे ,और कुछ अपने अपने ग्रुप में मैडम से अनुमति लेकर आस पास घूमने लगे। अंजुरी,कैलाश प्रभा और कमलेश्वर भी निकल पड़े। कैलाश और प्रभा आगे निकल गए और अंजुरी कमलेश्वर को ऊपर पेड़ पर कोई विशेष चिड़िया दिखाने लगी --कहाँ ? कहाँ ? करता कमल पंजों के बल खड़ा होकर देखने की कोशिश कर रहा था ,जब अंजुरी खिलखिलाती हुई एक ओर भागी ---कमलेश्वर समझ गया कि वह उसे झूठ बोल रही थी --वह भी उसके पीछे भागा --उसे अंजुरी तक पहुँचते देर नहीं लगी --उसने जाकर उसे पीछे से जकड लिया --अंजुरी ने ज़रा भी विरोध नहीं किया --वह घूम कर उससे लिपट गई ---क्रमशः -------
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