सभी लोग पूरी तरह थक चुके थे जब वापस पहुंचे। सभी छात्र छात्राओं ने अपने अपने वापस जाने की व्यवस्था पहले ही की हुई थी। चूँकि शाम ढल रही थी। अंजुरी के लिए भी पापा ने जीप भेज दी थी। सभी ने एक दूसरे से विदा ली और अपने अपने घर को चले। तीनो प्रोफेसर्स ने संतोष की सांस ली और वे भी घर की ओर चल दिए। अंजुरी और कमलेश्वर दोनों की मधुर घड़ियों में दो लड़ियाँ और जुड़ गईं थीं।
दूसरा दिन आम सा ही रहा अति व्यस्त ,पढाई और क्लासेज।कमलेश्वर को अभी ज़िले तक जाकर किताबें भीं लानी थी। उसके सामने दो पर्याय थे या तो वह अगले रविवार की प्रतीक्षा करे। या किसी और से मंगवाए। उसने इस बारे में अंतिम पीरियड में उसने अंजुरी को भी बताया था। अंजुरी ने सलाह दी थी कि किसी और से ही मंगवा ले। कमलेश्वर को भी उसकी सलाह ठीक लगी। प्रभा भी वहीँ खड़ी थी,वह बोली हमारे मेडिकल स्टोर से सुरेश सोलंकी दवाएं लेने जाता रहता है और कल वह जाने वाला है। कमलेश्वर बोलै तो ठीक है ,किताबों की लिस्ट भी मेरे पास है और ,रुपये भी पॉकेट में ही हैं ,तुम इन्हे रख लो, और जब किताबें आ जाएँ तो मुझे बता देना मैं दुकान से ही उठा लूँगा। अंजुरी को भी यह विचार पसंद आया,कमलेश्वर ने रुपये और किताबों की लिस्ट प्रभा को दे दी और वह निश्चिन्त हो गया। प्रभा ने रुपये और लिस्ट को सहेज कर रख लिया। और वे लोग विदा लेकर अपने अपने घर को चले गए।
घर पहुँच कर अंजुरी ने रसोई में काम करती मम्मी को हाथ बंटाया। जब भी उसका मन होता वह मम्मी की मदद किया करती थी। उसकी माँ अंजना मात्र दसवीं पास थी और परंपरागत परिवार में उनकी परवरिश हुई थी। पिता कलेक्टर ऑफिस में मुंशी थे। अंजना इकलौती थीं और इसी दौरान ,पिताजी को ,अनमोल ठाकुर नाम के प्रतिभाशाली युवक से भेंट हुई जो तहसीलदार पोस्ट की प्रतियोगी परीक्षा में सहभागी होने जा रहे थे। मुंशी जी एक बार उन्हें अपने घर ले आये ,अंजना को वे अच्छे लगे और उन्हें अंजना, दोनों ही संविधान द्वारा आरक्षित विशेष वर्ग से थे,अतः अनमोल की माताजी ने दोनों के विवाह की सहमति दे दी थी। अंजुरी के जन्म तक ,अंजना, अनमोल जी की माताजी के साथ गांव में ही रही,अनमोल भी इकलौते थे और अपनी माताजी से बहुत स्नेह करते थे,लेकिन दुर्भाग्य वश वे एक असाध्य रोग की शिकार हो गईं और संसार छोड़ कर चली गईं। उधर अंजुरी जब दस वर्ष की हुई तो मुंशी जी भी हृदय घात का शिकार हो गए। अंजुरी उन सभी की दुलारी तो थी ही , माता पिता की तो और भी ज्यादा प्यारी। वे प्रायः ईश्वर का धन्यवाद देते कि इतनी सुन्दर और प्रतिभाशाली पुत्री उनकी गोद में प्रभु ने डाली। अंजुरी भी अपने माता पिता से अत्यंत प्रेम करती थी। बस कमलेश्वर उसके जीवन में जिस प्रकार आया था, उसने अंजुरी के हृदय के एक हिस्से पर अधिकार कर लिया था। वह अंजुरी जो कोई बात भी माता पिता से नहीं छुपाती,इस बात को छुपा गई। ----क्रमशः
दूसरा दिन आम सा ही रहा अति व्यस्त ,पढाई और क्लासेज।कमलेश्वर को अभी ज़िले तक जाकर किताबें भीं लानी थी। उसके सामने दो पर्याय थे या तो वह अगले रविवार की प्रतीक्षा करे। या किसी और से मंगवाए। उसने इस बारे में अंतिम पीरियड में उसने अंजुरी को भी बताया था। अंजुरी ने सलाह दी थी कि किसी और से ही मंगवा ले। कमलेश्वर को भी उसकी सलाह ठीक लगी। प्रभा भी वहीँ खड़ी थी,वह बोली हमारे मेडिकल स्टोर से सुरेश सोलंकी दवाएं लेने जाता रहता है और कल वह जाने वाला है। कमलेश्वर बोलै तो ठीक है ,किताबों की लिस्ट भी मेरे पास है और ,रुपये भी पॉकेट में ही हैं ,तुम इन्हे रख लो, और जब किताबें आ जाएँ तो मुझे बता देना मैं दुकान से ही उठा लूँगा। अंजुरी को भी यह विचार पसंद आया,कमलेश्वर ने रुपये और किताबों की लिस्ट प्रभा को दे दी और वह निश्चिन्त हो गया। प्रभा ने रुपये और लिस्ट को सहेज कर रख लिया। और वे लोग विदा लेकर अपने अपने घर को चले गए।
घर पहुँच कर अंजुरी ने रसोई में काम करती मम्मी को हाथ बंटाया। जब भी उसका मन होता वह मम्मी की मदद किया करती थी। उसकी माँ अंजना मात्र दसवीं पास थी और परंपरागत परिवार में उनकी परवरिश हुई थी। पिता कलेक्टर ऑफिस में मुंशी थे। अंजना इकलौती थीं और इसी दौरान ,पिताजी को ,अनमोल ठाकुर नाम के प्रतिभाशाली युवक से भेंट हुई जो तहसीलदार पोस्ट की प्रतियोगी परीक्षा में सहभागी होने जा रहे थे। मुंशी जी एक बार उन्हें अपने घर ले आये ,अंजना को वे अच्छे लगे और उन्हें अंजना, दोनों ही संविधान द्वारा आरक्षित विशेष वर्ग से थे,अतः अनमोल की माताजी ने दोनों के विवाह की सहमति दे दी थी। अंजुरी के जन्म तक ,अंजना, अनमोल जी की माताजी के साथ गांव में ही रही,अनमोल भी इकलौते थे और अपनी माताजी से बहुत स्नेह करते थे,लेकिन दुर्भाग्य वश वे एक असाध्य रोग की शिकार हो गईं और संसार छोड़ कर चली गईं। उधर अंजुरी जब दस वर्ष की हुई तो मुंशी जी भी हृदय घात का शिकार हो गए। अंजुरी उन सभी की दुलारी तो थी ही , माता पिता की तो और भी ज्यादा प्यारी। वे प्रायः ईश्वर का धन्यवाद देते कि इतनी सुन्दर और प्रतिभाशाली पुत्री उनकी गोद में प्रभु ने डाली। अंजुरी भी अपने माता पिता से अत्यंत प्रेम करती थी। बस कमलेश्वर उसके जीवन में जिस प्रकार आया था, उसने अंजुरी के हृदय के एक हिस्से पर अधिकार कर लिया था। वह अंजुरी जो कोई बात भी माता पिता से नहीं छुपाती,इस बात को छुपा गई। ----क्रमशः
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