कमलेश्वर तो एक अपराधी सा ही महसूस करता रहा। उसे रात भर नींद नहीं आयी। उसके मन में प्रश्नों के बवंडर उठ रहे थे किन्तु उसके पास किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं था। उसे लग रहा था उसने अंजुरी को खो दिया था शायद। क्या वो उसे क्षमा करेगी ? लेकिन यह घटित क्या था ? क्या पाप था ? क्या अपराध था ? क्या भूल थी ? क्या अक्षम्य थी ? उसे बहुत अस्वस्थ सा लग रहा था। उसकी आँख सुबह सुबह ही लगी। पापा ने डाइनिंग टेबल पर उसे ना पाया तो उसके कमरे में आकर देख गए। उसका मस्तक छू कर देखा ,संतुष्ट हुए कि उसे ज्वर नहीं था। वे नाश्ता करके अपने फार्म हाउस पर चले गए।
जब कमलेश्वर उठा तो दोपहर हो चुकी थी। वह नीचे जाकर चाय पी कर आया ,और फिर नहा कर नीचे आया। रामू काका ने खाना लगा दिया। मिश्री बाई और इमरती भी घर की सफाई करके कपडे धो रहीं थीं। बेमन से ही कमलेश्वर ने खाना खाया। फिर अपने कमरे में आकर एक उपन्यास निकाला और पढ़ने की कोशिश की ,लेकिन मन नहीं लगा। उधर अंजुरी भी किसी तरह दिन बीत जाय यही सोच रही थी। आमतौर पर छुट्टी के दिन हमेशा चहकने वाली अंजुरी खामोश थी। अपने कमरे में ही किताब सामने रख कर जाने कहाँ खोई हुई। अगले दिन महाविद्यालय में अंजुरी और कमलेश्वर की आँखें मिली ,लेकिन दोनों ही ना जाने क्यों एक दूसरे से आँखें चुराते रहे। और छुट्टी होने पर अपने अपने घर चले गए।
घर पहुँची तो अंजुरी को मम्मी बोली कि नानी की तबियत ठीक नहीं है और मम्मी को वहां जाकर उनके साथ रहना होगा। चूँकि अंजुरी अपनी क्लासेज मिस नहीं कर सकती थी ,तो क्या वह स्वयं को मैनेज कर लेगी ? क्यूंकि पापा ने भी दो दिन की छुट्टी ली है और वे मम्मी को पहुँचाने जाने वाले हैं।
अंजुरी ने कहा ," मम्मी तुम चिंता ना करो ,मुझे कोई परेशानी नहीं होगी "लेकिन मम्मी पापा दोनों का ही दिल उसे अकेला छोड़ने को नहीं मान रहा था ,कि तहसील बस्ती से विपरीत दिशा में थी। ---क्रमशः--
जब कमलेश्वर उठा तो दोपहर हो चुकी थी। वह नीचे जाकर चाय पी कर आया ,और फिर नहा कर नीचे आया। रामू काका ने खाना लगा दिया। मिश्री बाई और इमरती भी घर की सफाई करके कपडे धो रहीं थीं। बेमन से ही कमलेश्वर ने खाना खाया। फिर अपने कमरे में आकर एक उपन्यास निकाला और पढ़ने की कोशिश की ,लेकिन मन नहीं लगा। उधर अंजुरी भी किसी तरह दिन बीत जाय यही सोच रही थी। आमतौर पर छुट्टी के दिन हमेशा चहकने वाली अंजुरी खामोश थी। अपने कमरे में ही किताब सामने रख कर जाने कहाँ खोई हुई। अगले दिन महाविद्यालय में अंजुरी और कमलेश्वर की आँखें मिली ,लेकिन दोनों ही ना जाने क्यों एक दूसरे से आँखें चुराते रहे। और छुट्टी होने पर अपने अपने घर चले गए।
घर पहुँची तो अंजुरी को मम्मी बोली कि नानी की तबियत ठीक नहीं है और मम्मी को वहां जाकर उनके साथ रहना होगा। चूँकि अंजुरी अपनी क्लासेज मिस नहीं कर सकती थी ,तो क्या वह स्वयं को मैनेज कर लेगी ? क्यूंकि पापा ने भी दो दिन की छुट्टी ली है और वे मम्मी को पहुँचाने जाने वाले हैं।
अंजुरी ने कहा ," मम्मी तुम चिंता ना करो ,मुझे कोई परेशानी नहीं होगी "लेकिन मम्मी पापा दोनों का ही दिल उसे अकेला छोड़ने को नहीं मान रहा था ,कि तहसील बस्ती से विपरीत दिशा में थी। ---क्रमशः--
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