लेकिन अंजुरी ने एक अच्छा सुझाव दिया कि रात को सोने के लिए दोनों दिन ड्राइवर रघुनाथ की पत्नी पार्वती को सोने के लिए कह दिया जाय। वह एक दो बार मम्मी की अचार पापड इत्यादि में मदद करवाने
घर आ चुकी थी हंसमुख थी और उसकी कोई संतान नहीं थी। मम्मी पापा दोनों को ही यह सुझाव पसंद आ गया और आनन् फानन में रघुनाथ से कह दिया कि शाम को यहाँ आ जाय "कितने बजे कह दूँ ?"सात बजे ठीक रहेगा ,आखिर वह भी अपने घर में खाना बना खा कर आएगी और मैं भी कुछ बना कर खा लूंगी तब तक " मम्मी पापा को उसका सुझाव पसंद आया और उन्होंने उसी समय रघुनाथ से कह दिया। एक चाभी अंजुरी ने ले ली और मम्मी पापा से विदा लेकर महा विद्यालय को चल दी। वह कुछ जल्दी ही पहुँच गई। आज वह कमलेश्वर से कुछ बातों का स्पष्टीकरण लेना चाहती थी। उसने देखा कि कमलेश्वर भी आ रहा था। हमेशा चमकने वाला चेहरा ,मुरझाया हुआ था। अंजुरी ने कहा "आज छुट्टी के बाद देवी माँ के मंदिर चलना है "वह और कुछ कहे बिना क्लास में चली गई " सभी पीरियड्स सामान्य रूप से हुए। अति व्यस्त और प्रतिदिन के अनुरूप ही।
अंजुरी छुट्टी होते ही निकल कर झपटती हुई ,सड़क पार कर सामने की पगडंडी पर जा पहुँची। पांच मिनिट बाद ही सन्नाटा देखते हुए ,कमलेश्वर भी ,सड़क पार कर पगडंडी पर जा पहुंचा। उसने देखा अंजुरी तेजी से सीढ़ियां चढ़ती जा रही है। उसका दिल धड़क रहा था ,जाने अंजुरी क्या कहने वाली थी ?
दोनों ही देवी माँ के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए। दोनों ही माँ से अपने प्रश्नों के उत्तर चाहते थे।
दर्शन के बाद दोनों ही अपनी छुपी हुई जगह पर आ बैठे। अंजुरी ने बात शुरू की "अब क्या ?"अभी तक तो तुम अपने पापा के कठोर स्वभाव और अपनी कठोर परम्पराओं का वास्ता देते रहे ,और कहते रहे कि यह सम्बन्ध कैसे आगे चलेगा ? और अब ? जो कुछ भी कल तुमने किया ,उसे तुम किस प्रकार देखते हो ? हम सभी मूलतः हिन्दू हैं और हम अच्छी तरह समझते हैं कि जो कुछ भी जाने या अनजाने घटित हुआ उसका अर्थ क्या है ? कमलेश्वर बस सर झुकाये सुन रहा था ,हाथ से ज़मीन कुरेद रहा था ----क्रमशः ----
घर आ चुकी थी हंसमुख थी और उसकी कोई संतान नहीं थी। मम्मी पापा दोनों को ही यह सुझाव पसंद आ गया और आनन् फानन में रघुनाथ से कह दिया कि शाम को यहाँ आ जाय "कितने बजे कह दूँ ?"सात बजे ठीक रहेगा ,आखिर वह भी अपने घर में खाना बना खा कर आएगी और मैं भी कुछ बना कर खा लूंगी तब तक " मम्मी पापा को उसका सुझाव पसंद आया और उन्होंने उसी समय रघुनाथ से कह दिया। एक चाभी अंजुरी ने ले ली और मम्मी पापा से विदा लेकर महा विद्यालय को चल दी। वह कुछ जल्दी ही पहुँच गई। आज वह कमलेश्वर से कुछ बातों का स्पष्टीकरण लेना चाहती थी। उसने देखा कि कमलेश्वर भी आ रहा था। हमेशा चमकने वाला चेहरा ,मुरझाया हुआ था। अंजुरी ने कहा "आज छुट्टी के बाद देवी माँ के मंदिर चलना है "वह और कुछ कहे बिना क्लास में चली गई " सभी पीरियड्स सामान्य रूप से हुए। अति व्यस्त और प्रतिदिन के अनुरूप ही।
अंजुरी छुट्टी होते ही निकल कर झपटती हुई ,सड़क पार कर सामने की पगडंडी पर जा पहुँची। पांच मिनिट बाद ही सन्नाटा देखते हुए ,कमलेश्वर भी ,सड़क पार कर पगडंडी पर जा पहुंचा। उसने देखा अंजुरी तेजी से सीढ़ियां चढ़ती जा रही है। उसका दिल धड़क रहा था ,जाने अंजुरी क्या कहने वाली थी ?
दोनों ही देवी माँ के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए। दोनों ही माँ से अपने प्रश्नों के उत्तर चाहते थे।
दर्शन के बाद दोनों ही अपनी छुपी हुई जगह पर आ बैठे। अंजुरी ने बात शुरू की "अब क्या ?"अभी तक तो तुम अपने पापा के कठोर स्वभाव और अपनी कठोर परम्पराओं का वास्ता देते रहे ,और कहते रहे कि यह सम्बन्ध कैसे आगे चलेगा ? और अब ? जो कुछ भी कल तुमने किया ,उसे तुम किस प्रकार देखते हो ? हम सभी मूलतः हिन्दू हैं और हम अच्छी तरह समझते हैं कि जो कुछ भी जाने या अनजाने घटित हुआ उसका अर्थ क्या है ? कमलेश्वर बस सर झुकाये सुन रहा था ,हाथ से ज़मीन कुरेद रहा था ----क्रमशः ----
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