शराफत-----------------------
कहाँ थे हम कहाँ आ गए हैं,
जाने किस ओर चले जा रहे हैं,
क्या थे हम क्या हो गए हैं,
जाने क्या बने जा रहे हैं
बदल गई इबारतें सारी ,
ढह गई इमारतें सारी
अच्छा बुरा सही गलत,
सब घुल मिल कर एक हो गया,
इंसान अब नहीं लगता इंसान सा,
मर गई इंसानियत सारी ,
सयानेपन की न पूछ ए दोस्त,
यहाँ हर एक है दूजे से सयाना ज्यादा,
शरीफों की चारों और दिखती है भीड़,
लेकिन काफूर हो गईं शराफतें सारी।
शब्द-अर्थ---काफूर--गायब,इबारत--लिखी हुई तहरीर
शरारा ---------------------------
दूर बहुत दूर हो तो,
लुभाता है शरारा ,
दामन से लिपट जाए तो,
जलाता है शरारा,
ख़ुशी जब हो तो,
जगमगाता है शरारा,
गुस्से में आँखें ,
उगलतीं हैं शरारा,
ग़मों की आग लेकिन,
बुझा देती है शरारा ,
हो जश्न का माहौल तो,
आतिशबाजी का शरारा ,
अपनी पर आ जाए तो,
तबाही है शरारा,
कितने रूप कितने रंग हैं,
बस एक छोट सा है शरारा !
शब्द अर्थ---शरारा --चिंगारी,
कहाँ थे हम कहाँ आ गए हैं,
जाने किस ओर चले जा रहे हैं,
क्या थे हम क्या हो गए हैं,
जाने क्या बने जा रहे हैं
बदल गई इबारतें सारी ,
ढह गई इमारतें सारी
अच्छा बुरा सही गलत,
सब घुल मिल कर एक हो गया,
इंसान अब नहीं लगता इंसान सा,
मर गई इंसानियत सारी ,
सयानेपन की न पूछ ए दोस्त,
यहाँ हर एक है दूजे से सयाना ज्यादा,
शरीफों की चारों और दिखती है भीड़,
लेकिन काफूर हो गईं शराफतें सारी।
शब्द-अर्थ---काफूर--गायब,इबारत--लिखी हुई तहरीर
शरारा ---------------------------
दूर बहुत दूर हो तो,
लुभाता है शरारा ,
दामन से लिपट जाए तो,
जलाता है शरारा,
ख़ुशी जब हो तो,
जगमगाता है शरारा,
गुस्से में आँखें ,
उगलतीं हैं शरारा,
ग़मों की आग लेकिन,
बुझा देती है शरारा ,
हो जश्न का माहौल तो,
आतिशबाजी का शरारा ,
अपनी पर आ जाए तो,
तबाही है शरारा,
कितने रूप कितने रंग हैं,
बस एक छोट सा है शरारा !
शब्द अर्थ---शरारा --चिंगारी,
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