सहारे------
ढूँढोगे कब तक सहारे सहारे,
जियो शान से हों खिजां या बहारें,
पाओगे मोती जब डुबकी लगाओगे,
चाहे समंदर हों कितने भी गहरे,
रहते हैं रीते,रहते हैं बेनाम,
चलते हैं जो बस किनारे किनारे,
बड़े काम के हैं,ये फलसफे,
चाहे हमारे,चाहे तुम्हारे,
जो अपनाए इनको,
वो हैं समझ वाले,
मुश्किलों की तोड़ें मजबूत दीवारें ,
जियें ख़ुशी से अपना जीवन संवारें !
शब्द अर्थ---फलसफे--दर्शन,खिजां --पतझड़
सलीका-------
दुनिया ने सिखा दिया जीना,
हम तो थे बदगुमान,
नहीं जानते थे जीने का सलीका,
के हर शख्स है,एक राज़,
और उससे जुडी हर बात है पोशीदा,
गर बनाना है जिंदगी को कामयाब,
तो बन जाओ एक राज़,
और अपनी हर बात को रखो पोशीदा,
नज़रे बद से बचना है अगर,
तो बंद कर लो ताले में,अपना वजूद!
शब्द अर्थ---सलीका--शऊर या ढंग,बदगुमान--गलत फहमी,
पोशीदा--गुप्त,नज़रेबद--बुरी नज़र
सौदा-----------------
ग़मों की शुरुआत का वो दिन,
आज तक न भूली मैं,
वो आंसूं जो बहते रहे सारी रात,
भिगोते रहे तकिया,
आज भी उनकी नमी से,
रूह मेरी नम है,
हर शख्स करते दिखा सौदा,
हर एक था माहिर सौदागर,
सबने खरीदी बेहतर जिंदगी,
सबने चुने बेहतर रास्ते,
सब पहुंचे मनचाही मंजिलों पर,
मैं लौट आई खोटे सिक्के की मानिंद,
अपने पास,
क्योंकि मुझसे बेहतर मेरा सौदागर कौन हो सकता है?
क्योंकि मैं ही जानती हूँ मैं क्या हूँ,
मेरी कीमत क्या है!
शब्द अर्थ---मानिंद-तरह,माहिर--कुशल
ढूँढोगे कब तक सहारे सहारे,
जियो शान से हों खिजां या बहारें,
पाओगे मोती जब डुबकी लगाओगे,
चाहे समंदर हों कितने भी गहरे,
रहते हैं रीते,रहते हैं बेनाम,
चलते हैं जो बस किनारे किनारे,
बड़े काम के हैं,ये फलसफे,
चाहे हमारे,चाहे तुम्हारे,
जो अपनाए इनको,
वो हैं समझ वाले,
मुश्किलों की तोड़ें मजबूत दीवारें ,
जियें ख़ुशी से अपना जीवन संवारें !
शब्द अर्थ---फलसफे--दर्शन,खिजां --पतझड़
सलीका-------
दुनिया ने सिखा दिया जीना,
हम तो थे बदगुमान,
नहीं जानते थे जीने का सलीका,
के हर शख्स है,एक राज़,
और उससे जुडी हर बात है पोशीदा,
गर बनाना है जिंदगी को कामयाब,
तो बन जाओ एक राज़,
और अपनी हर बात को रखो पोशीदा,
नज़रे बद से बचना है अगर,
तो बंद कर लो ताले में,अपना वजूद!
शब्द अर्थ---सलीका--शऊर या ढंग,बदगुमान--गलत फहमी,
पोशीदा--गुप्त,नज़रेबद--बुरी नज़र
सौदा-----------------
ग़मों की शुरुआत का वो दिन,
आज तक न भूली मैं,
वो आंसूं जो बहते रहे सारी रात,
भिगोते रहे तकिया,
आज भी उनकी नमी से,
रूह मेरी नम है,
हर शख्स करते दिखा सौदा,
हर एक था माहिर सौदागर,
सबने खरीदी बेहतर जिंदगी,
सबने चुने बेहतर रास्ते,
सब पहुंचे मनचाही मंजिलों पर,
मैं लौट आई खोटे सिक्के की मानिंद,
अपने पास,
क्योंकि मुझसे बेहतर मेरा सौदागर कौन हो सकता है?
क्योंकि मैं ही जानती हूँ मैं क्या हूँ,
मेरी कीमत क्या है!
शब्द अर्थ---मानिंद-तरह,माहिर--कुशल
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