सफ़र--------
नादानियाँ अक्सर,
बरपा करतीं हैं कहर,
टूट जाते हैं कई दिल,
जब चुभते हैं नश्तर,
दुआ करता है दिल,
या खुदा!रहम कर,रहम कर,
क्यों दुश्मनी करता है इंसा ,
क्यों घोलता है नफरत का ज़हर,
क्यों नहीं बनता हमदर्द एक दूसरे का,
छोटी सी दुनिया,थोड़े से लोग,
और इससे भी कम,
इंसानी जिंदगी का सफ़र!
शब्द अर्थ---नश्तर--छुरियां
सहर-----
मुड कर नहीं देखता कोई,
आगे बढ़ जाने के बाद,
अँधेरे डूब जाते हैं,
रोशनी होने के बाद,
बेनकाब हो जाते हैं लोग,
साज़िश फाश हो जाने के बाद,
शर्मिंदा मगर नहीं होते,
इतनी बदनामी के बाद,
हर नई शुरुआत होती है,
पुरानी बीतने के बाद,
सहर आती है हमेशा,
रात के ढलने के बाद,
बुढ़ापा ठहर जाता है,
जवानी तर्क होने के बाद,
कुछ नहीं होता लेकिन ,
मौत के आने के बाद!
शब्द अर्थ--निजात--छुटकारा,मुफलिसी--गरीबी साजिश फाश-षड्यंत्र का पता लगना
नादानियाँ अक्सर,
बरपा करतीं हैं कहर,
टूट जाते हैं कई दिल,
जब चुभते हैं नश्तर,
दुआ करता है दिल,
या खुदा!रहम कर,रहम कर,
क्यों दुश्मनी करता है इंसा ,
क्यों घोलता है नफरत का ज़हर,
क्यों नहीं बनता हमदर्द एक दूसरे का,
छोटी सी दुनिया,थोड़े से लोग,
और इससे भी कम,
इंसानी जिंदगी का सफ़र!
शब्द अर्थ---नश्तर--छुरियां
सहर-----
मुड कर नहीं देखता कोई,
आगे बढ़ जाने के बाद,
अँधेरे डूब जाते हैं,
रोशनी होने के बाद,
बेनकाब हो जाते हैं लोग,
साज़िश फाश हो जाने के बाद,
शर्मिंदा मगर नहीं होते,
इतनी बदनामी के बाद,
हर नई शुरुआत होती है,
पुरानी बीतने के बाद,
सहर आती है हमेशा,
रात के ढलने के बाद,
बुढ़ापा ठहर जाता है,
जवानी तर्क होने के बाद,
कुछ नहीं होता लेकिन ,
मौत के आने के बाद!
शब्द अर्थ--निजात--छुटकारा,मुफलिसी--गरीबी साजिश फाश-षड्यंत्र का पता लगना
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