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शनिवार, 7 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !!{138}Lamha-Lamha !!

लम्हा लम्हा-----------
आज कल में बदल जाता है,
कल परसों में,
पल के बाद पल और,
कल के बाद कल,
आता जाता  है
फिसलते जा रहे है पल,
इतनी जल्दि आज हुआ कल
और कल बन जाएगा कल,
कितनी तेज रफ़्तार,
मुट्ठी से मानो फसलती रेत ,
निकलता है सूरज,
और डूब जाता है,
हर रात बीत जाती है,
और सवेरा हो जाता है,
महीने पर महीने बीत जाते हैं,
हर बरस एक नया बरस आता है,
वक़्त हैं कम फ़र्ज़ हैं बेशुमार,
आखिर क्या है जिंदगी,
पानी पर लिखी हुई तहरीर ,
जो दिखती भी नहीं मिटती भी नहीं
या किसी जादूगर का जादू,
जो दिखता है पर होता नहीं,
या फिर ख्वाब,जो टूटते ही हो जाता है गुम
तारीख बदल जाती है हर दिन,
हर बरस केलेंडर भी बदल जाता है,
उम्र बढती है या घट जाती है उम्र
चलता रहता है यह सिलसिला
एक दिन इंसान मर जाता है।
शब्द-अर्थ--तहरीर--लिखित व्याख्या

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