सियासत-------------{प्रकाशित ,अक्तूबर 2005 "मज़मून"पत्रिका में }
एक शतरंज का खेल है सियासत,
हर सियासतदां ,है खिलाडी,
छुपती नहीं है जिसकी,शान- ओ - शौकत,
आईने हैं सभी ,एक दूसरे के,
लगाते रहते हैं आपस में फ़िज़ूल की तोहमत,
करते हैं खिलाफत,दिखाते हैं रकाबत,
कई कई नकाबों से ढके होते हैं चेहरे ,
जब उलटती है नकाब तो होती है हैरत,
सौदागर हैं ये नायाब,
लूटते रहते हैं मुल्क की दौलत,
कोई मायने नहीं रखती इनको,
गरीब की मुश्किल,शहीद की शहादत,
क्यों कि अवाम की रिआया ही तो हैं मोहरे,
जिन्हें वे बनाए रखते हैं अलामत,
ताकि खेल चलता रहे सही सलामत!
शब्द--अर्थ---सियासत--राजनीति ,सियासतदां --राजनीतिज्ञ ,तोहमत--आक्षेप,रकाबत-दुश्मनी ,खिलाफत--विरोध,रिआया--जनता,अलामत--दुर्भाग्य,सलामत--निर्विघ्न रूप से,नायाब--अतुलनीय
एक शतरंज का खेल है सियासत,
हर सियासतदां ,है खिलाडी,
छुपती नहीं है जिसकी,शान- ओ - शौकत,
आईने हैं सभी ,एक दूसरे के,
लगाते रहते हैं आपस में फ़िज़ूल की तोहमत,
करते हैं खिलाफत,दिखाते हैं रकाबत,
कई कई नकाबों से ढके होते हैं चेहरे ,
जब उलटती है नकाब तो होती है हैरत,
सौदागर हैं ये नायाब,
लूटते रहते हैं मुल्क की दौलत,
कोई मायने नहीं रखती इनको,
गरीब की मुश्किल,शहीद की शहादत,
क्यों कि अवाम की रिआया ही तो हैं मोहरे,
जिन्हें वे बनाए रखते हैं अलामत,
ताकि खेल चलता रहे सही सलामत!
शब्द--अर्थ---सियासत--राजनीति ,सियासतदां --राजनीतिज्ञ ,तोहमत--आक्षेप,रकाबत-दुश्मनी ,खिलाफत--विरोध,रिआया--जनता,अलामत--दुर्भाग्य,सलामत--निर्विघ्न रूप से,नायाब--अतुलनीय
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें