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रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !!{54} Kaaynaat !!

कायनात-----

कितनी खूबसूरत है यह कायनात,
खुदा  की करिश्माई इनायत है,
इसे लफ़्ज़ों में बयां करना नामुमकिन भी है,
और शायद हिमाकत है,
फिर भी कोशिश करना,करते रहना इन्सान की फितरत है,
ये कोहरा,ये सर्द मौसम,
ये आसमां से गिरती शबनम,
पत्तों पर चमकते ये मोती और,
 दूर दूर तक फैला ये सब्ज़ कालीन,
मानो दुपट्टा लहरा रही हो कोई नाजनीन,
बारिश की रिमझिम ?आफरीन,आफरीन 
सब्ज़ पहनावे में मानो,
नह रही हो कोई नाजनीन,
रात कितनी हसीन?
सितारों से जड़ी ओढ़नी पहने,
शरमा  रही हो  नई दुलहिन 
गर निकला हो माहताब,
तो शबाब लाज़वाब 
जब निकले आफताब?
तो खिले हर गुलाब 
खुश हो जाए हर जान ए जहान 
हर पत्ता हर बूटा हर बागबान,हर गुलिस्तान,
क्या कुछ कर पाई हूँ बयां ,जो कुछ होता है अयां ,
काश!
लिख पाती आँखें ,
देख पाती जुबां !

शब्द - अर्थ---कायनात--प्रकृति,सब्ज़--हरा,अयां --प्रकट करना ,आफरीन--हर्ष अभिव्यक्ति 

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