खाक-----
कितना ताकतवर है इंसान ,
झेल जाता है बड़े बड़े गम,
हर वक़्त होता रहता है दो चार,
छोटी बड़ी परेशानियों से ,
मुसीबतों के बड़े बड़े थपेड़े भी नहीं मिटा पाते,
वह जीता रहता है,हर गम भूलता रहता है,
हर मुसीबत का सामना करता रहता है,
जल्द ही सूख जाते हैं आंसू,
वक़्त लगा देता है मरहम,
मिट जाते हैं ज़ख्मों के निशान
और वह फिर तैयार हो जाता है,
नए ज़ख्म खाने के लिए,
हर वक़्त,खाक होता रहता है थोडा थोडा,
खाक में मिल जाने तक!
खाक--राख
कितना ताकतवर है इंसान ,
झेल जाता है बड़े बड़े गम,
हर वक़्त होता रहता है दो चार,
छोटी बड़ी परेशानियों से ,
मुसीबतों के बड़े बड़े थपेड़े भी नहीं मिटा पाते,
वह जीता रहता है,हर गम भूलता रहता है,
हर मुसीबत का सामना करता रहता है,
जल्द ही सूख जाते हैं आंसू,
वक़्त लगा देता है मरहम,
मिट जाते हैं ज़ख्मों के निशान
और वह फिर तैयार हो जाता है,
नए ज़ख्म खाने के लिए,
हर वक़्त,खाक होता रहता है थोडा थोडा,
खाक में मिल जाने तक!
खाक--राख
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