आफताब -----
एक लंबी उम्र गुजर जाने के बाद
मैंने झाँका जो दामन अपना,
तो पाया उनमे खार ही भरे थे,
लेकिन एक फूल मुस्कुरा रहा था,
पाकीज़ा तबस्सुम लिए,
वह जगमगा भी रहा था,
आफताब की तरह,
उसकी खुशबू से,उसकी रौशनी से,
सराबोर हो रहा था,
जार जार होता मेरा दामन ,
मैंने उसे उठाया,चूमा,
सर माथे से लगाया,
दामन के सारे कांटें झटक कर,चल दी,
उसकी खुशबू और रोशनी के साथ।
एक लंबी उम्र गुजर जाने के बाद
मैंने झाँका जो दामन अपना,
तो पाया उनमे खार ही भरे थे,
लेकिन एक फूल मुस्कुरा रहा था,
पाकीज़ा तबस्सुम लिए,
वह जगमगा भी रहा था,
आफताब की तरह,
उसकी खुशबू से,उसकी रौशनी से,
सराबोर हो रहा था,
जार जार होता मेरा दामन ,
मैंने उसे उठाया,चूमा,
सर माथे से लगाया,
दामन के सारे कांटें झटक कर,चल दी,
उसकी खुशबू और रोशनी के साथ।
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