मुकम्मल जहान -------
एक मुकम्मल जहान की ख्वाहिश,
खयाल पुरकशिश ,
और उसे पा लेने की,
होती है हर कोशिश,
चलना शुरू करता है इंसान,
तो मिलती हैं राहें बेशुमार,
उनपर खार भी बिछे होते हैं बेशुमार,
पिछली राह से जुडी होती है अगली राह,
वह किसी न किसी राह पर,
चलता ही रहता है,
जब मरता है,
तब भी खड़ा होता है,एक राह पर,
कई ख्वाहिशें भीं,
जिन्दा होतीं हैं दिल ओ दिमाग में,
लेकिन एक मुकम्मल जहाँ का ख्वाहिश,
दिल में लिए ,
सरे राह,
रुखसत हो जाता है वह,
इस जहान से!
शब्द अर्थ----मुकम्मल--पूर्णत:,पुरकशिश--आकर्षक,
एक मुकम्मल जहान की ख्वाहिश,
खयाल पुरकशिश ,
और उसे पा लेने की,
होती है हर कोशिश,
चलना शुरू करता है इंसान,
तो मिलती हैं राहें बेशुमार,
उनपर खार भी बिछे होते हैं बेशुमार,
पिछली राह से जुडी होती है अगली राह,
वह किसी न किसी राह पर,
चलता ही रहता है,
जब मरता है,
तब भी खड़ा होता है,एक राह पर,
कई ख्वाहिशें भीं,
जिन्दा होतीं हैं दिल ओ दिमाग में,
लेकिन एक मुकम्मल जहाँ का ख्वाहिश,
दिल में लिए ,
सरे राह,
रुखसत हो जाता है वह,
इस जहान से!
शब्द अर्थ----मुकम्मल--पूर्णत:,पुरकशिश--आकर्षक,
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