मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !!{68} Muhafiz !!

मुहाफ़िज़-------

मुहाफ़िज़ भी तू,मोहसिन भी तू,
तेरी तलबगार हूँ,तू ही है आरजू,
तुझे सोचती हूँ जब,
याद आता है घने दरख़्त का साया,
तेरा खयाल रहे हरदम,
हरदम तेरी ही जुस्तजू,
हमकदम रहा है बरसों से,
हमसफ़र हमदम है तू,
कभी कभी होती रही गोया,
तकरार हमारी गुफ्तगू,
बड़ी बड़ी मुसीबतों के पहाड़,
पार कर लिये ,
तेरे साथ थी मैं,
मेरे साथ था तू,
तसस्वुर में भी तू,दिखता है हर सू ,
बस यही सोचती हूँ,मेरी जिंदगी में,
और भी पहले क्यूँ न आया तू!

शब्द अर्थ--मुहाफ़िज़--रक्षक,मोहसीन--एहसान करने वाला,तलबगार--पाने की इच्छा,तसव्वुर--कल्पना हर सू --हर तरफ,जुस्तजू--पा लेने की इच्छा,आरजू--इच्छा,गुफ्तगू--वार्तालाप 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik upanyas Bhoot-Adbhut!(26)

When the bell  final bell rang , all the girls from different classes were coming out and rapidly going towards the main gate of the school,...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!