मेरे बारे में---Nirupama Sinha { M,A.{Psychology}B.Ed.,Very fond of writing and sharing my thoughts

मेरी फ़ोटो
I love writing,and want people to read me ! I some times share good posts for readers.

रविवार, 8 मार्च 2020

Wajood Se : By Nirupama Sinha !! {61} Khwahish {62}Kirdaar {63}Mazi{64}Mahfil !!

ख्वाहिश-----

एक ख्वाहिश पैदा करती है दूसरी ख्वाहिश,
दूसरी से उगती है तीसरी,
और ये सिलसिले जारी रहते हैं ता उम्र,
दरअसल तो होती है,
ख्वाहिशें इंसान की,
लेकिन ख्वाहिशों का एक दिन,
बन जाता है हुजूम,
जिसमे इंसान जाता है गुम ,
यही है इंसान जिंदगी का पूरा फ़ल्सफ़ा ,
यही है मज़मून!

शब्द अर्थ----फ़ल्सफ़ा --दर्शन,मज़मून-लिखित व्याख्या 

किरदार-------------------

सात तालों में बंद होते हैं अब,लोगो के वजूद,
जो सबसे ऊपर होता है,सबको दिखलाई पड़ता है,
वो दरअसल होता है एक किरदार,
जो वह निभा रहा होता है उस खास वक़्त में,
किरदार तो अलग अलग होतें हैं,
एक दिन में कई से लेकर एक उम्र में कई तक,
ताज्जुब तब होता है,जब,
एक वक़्त में एक किरदार के भी कई रंग दिखते हैं,
जो दरअसल बदरंग होते हैं,
गर कामयाब हो गए आप,
इन सात तालों के पीछे छुपे वजूद तक झाँक लेने में,
तो आप पायेंगे वहां,
एक शुष्क बंजर जमीन,कंटीली झाड़ियाँ बेतरतीब!

माज़ी -------------------

कुछ जलती बुझती सी रोशनियां,
कुछ मर्ज़ियां नामार्ज़ियां ,
ढेरों उदासियां और चंद खुशियां ,
गिनी और गिनाई मेहरबानियां ,
बेशुमार बेदर्दियां,
बंदिशें बेरहम,
बेलगाम आज़ादियां ,
मुलाकातें छुप छुप कर,
और सरे आम तनहाईयां,
महफ़िलों में आंखमिचौलियां  
मौकों पर सरगोशियां ,
चर्चे हर जुबान पर,
शहर भर में रूसवाईयां  
ज्यों अखबारों की सुर्खियां 
चंद मीठी यादें,
बेइख्तियार तल्खियां !

शब्द अर्थ---माजी--अतीत,बेलगाम--स्वच्छंद ,सरगोशियां --खुसफुसना ,रुसवाईयां--बदनामी, बेइख़्तियार --बेहिसाब,तल्खियां --कडवाहटें 

महफ़िल-----------------------

आए थे तेरी महफ़िल में,
कुछ सुनने कुछ सुनाने को हम,
सारा वक़्त बैठे रहे,सहमे हुए,
इस जमाने से हम,
तू रहा मसरूफ गैरों से घिरा,
बस बैठे रहे बेगाने से हम,
शोर शराबे से जवां रही तेरी महफ़िल,
बे आवाज़ खामोश तराने थे हम,
रोशन हो रहे थे सबकी उम्मीदों के चराग,
जल रहे थे बस परवाने से हम,
सब जी रहे थे जिंदगी पुरसुकून ,
बेचैन रहे दीवाने से हम,
ख्वाब सबके हुए हकीक़त में तब्दील ,
रह गए एक बेनूर अफ़साने से हम,
सभी जानते थे तलाश अपनी अपनी,
लापता रहे बेठिकाने से हम!
शब्द अर्थ--तब्दील--परिवर्तित,मसरूफ--व्यस्त,पुरसुकून--शांतिपूर्ण 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Dharavahik upanyas Bhoot-Adbhut!(26)

When the bell  final bell rang , all the girls from different classes were coming out and rapidly going towards the main gate of the school,...

Grandma Stories Detective Dora},Dharm & Darshan,Today's Tip !!