अकेला-----
अकेला ही आता अकेला ही जाता है इंसान,
ताजिंदगी अपनों की भीड़ में अकेला ही होता है इंसान,
चंद रोज का खेल तमाशा,चंद रोज की धूमधाम,
फिर सबकुछ सूनसान,
खुद का साथी,खुद का हमदम,
हमराज और हमपहचान,
क्या दुनिया,क्या दुनियादारी,इर्द गिर्द की रिश्तेदारी,
सब बेमानी सब बेकाम,
पर्दा गिर जाता है तब,
सबकुछ ख़त्म हो जाता है जब,
ख़ाक में मिल जाता है जिस्म,
निकल जाती है जिस्म से जान,
वह हो जाता है बेजान,
रह जाती हैं बस उसकी यादें,
और यादों में उसका नाम!
शब्द अर्थ---ताजिंदगी----जीवनभर,बेमानी-निरर्थक,बेकाम-बेकार
अकेला ही आता अकेला ही जाता है इंसान,
ताजिंदगी अपनों की भीड़ में अकेला ही होता है इंसान,
चंद रोज का खेल तमाशा,चंद रोज की धूमधाम,
फिर सबकुछ सूनसान,
खुद का साथी,खुद का हमदम,
हमराज और हमपहचान,
क्या दुनिया,क्या दुनियादारी,इर्द गिर्द की रिश्तेदारी,
सब बेमानी सब बेकाम,
पर्दा गिर जाता है तब,
सबकुछ ख़त्म हो जाता है जब,
ख़ाक में मिल जाता है जिस्म,
निकल जाती है जिस्म से जान,
वह हो जाता है बेजान,
रह जाती हैं बस उसकी यादें,
और यादों में उसका नाम!
शब्द अर्थ---ताजिंदगी----जीवनभर,बेमानी-निरर्थक,बेकाम-बेकार
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