मालूम हो गई आज सभी को
अपनी अपनी औकात
चाहे हो वो गरीब गुरबा
या धन्ना सेठ की औलाद
खुद को विकसित समझने वाला
अमरीकी ,इतालवी ,स्पेनिश,
ब्रिटिश ,डेनिश ,फ्रेंच
या रोज़ कमाने खाने वाला
खेतीहर किसान या मज़दूर
झुग्गी में रहता ,रोज़ ही ,
ज़िंदगी की जंग लड़ता इंसान
एक छोटे से कोरोना ने,जो अणु सा
बिना माइक्रो स्कोप के दिखाई भी ना दे
ढाया है ऐसा कहर सारी दुनिया पर
मर रहे हैं इंसान, इस तरह है उनकी तादाद
मानो मर रहे मक्खी कॉकरोच या मच्छर
यह प्रवेश करता है मानव शरीर में
बड़ी चालाकी से ,उसीकी गलती या लापरवाही से
और भीतर से नष्ट कर देता है ,इंसान का श्वसन तंत्र,
इसने बनाया है अपना आखेट उनको
जो हैं अधिकाँश वयस्क या वयोवृद्ध
यही तृतीय विश्वयुद्ध है,
भेद केवल यह है कि ,कोई अणु बम नहीं है
मानवता के विनाश के लिए
यह एक अणु वायरस है
जो आघात करता है मानव शरीर में भीतर से ,
क्यों हुआ यह सब ? अंधाधुंध भाग रहा था मानव
प्रगति की अंधी दौड़ में ,सभी भाग रहे थे,
बढ़ती जनसँख्या,कटते जंगल, प्रदूषण,नदी किनारे भू कटाव
भौतिकता ही लक्ष्य था सोना चांदी,गाडी,बँगला,प्रॉपर्टी,शेयर्स,विदेश यात्राएं
पार्टी ,ड्रिंक,पब ,पिज़्ज़ा,बर्गर --ये तो छोटी छोटी चीज़ें हैं
चाइना के वेट मार्केट में खुश होकर सांप बिच्छू चमगादड़ खाना
ज़िंदा बिल्ली ,कुत्ते ,बन्दर,पेंगोलिन के अंग निकालना,
उन्हें जीवित ही तवे पर या नीचे से आग लगा कर भून देना
उनके हृदय विदारक आर्तनाद से निष्प्रभाव,
ये कलियुग के राक्षस हैं ये ,जीवित पशु पक्षियों को खाने वाले
पशुओं में रहने वाला वायरस ,मनुष्य का हन्ता बन गया
धरती ! माँ है हमारी ,सृष्टि के लिए उसके सभी जीव जंतु
पेड़ पौधे,एक सामान हैं, कराह रही थी यह माँ वर्षों से
याद दिला दी सृष्टि ने, दिखा दिया है हम हैं केवल आदम जात ,
कुछ नहीं हम और इत्ती सी भी नहीं है हमारी औकात !!
अपनी अपनी औकात
चाहे हो वो गरीब गुरबा
या धन्ना सेठ की औलाद
खुद को विकसित समझने वाला
अमरीकी ,इतालवी ,स्पेनिश,
ब्रिटिश ,डेनिश ,फ्रेंच
या रोज़ कमाने खाने वाला
खेतीहर किसान या मज़दूर
झुग्गी में रहता ,रोज़ ही ,
ज़िंदगी की जंग लड़ता इंसान
एक छोटे से कोरोना ने,जो अणु सा
बिना माइक्रो स्कोप के दिखाई भी ना दे
ढाया है ऐसा कहर सारी दुनिया पर
मर रहे हैं इंसान, इस तरह है उनकी तादाद
मानो मर रहे मक्खी कॉकरोच या मच्छर
यह प्रवेश करता है मानव शरीर में
बड़ी चालाकी से ,उसीकी गलती या लापरवाही से
और भीतर से नष्ट कर देता है ,इंसान का श्वसन तंत्र,
इसने बनाया है अपना आखेट उनको
जो हैं अधिकाँश वयस्क या वयोवृद्ध
यही तृतीय विश्वयुद्ध है,
भेद केवल यह है कि ,कोई अणु बम नहीं है
मानवता के विनाश के लिए
यह एक अणु वायरस है
जो आघात करता है मानव शरीर में भीतर से ,
क्यों हुआ यह सब ? अंधाधुंध भाग रहा था मानव
प्रगति की अंधी दौड़ में ,सभी भाग रहे थे,
बढ़ती जनसँख्या,कटते जंगल, प्रदूषण,नदी किनारे भू कटाव
भौतिकता ही लक्ष्य था सोना चांदी,गाडी,बँगला,प्रॉपर्टी,शेयर्स,विदेश यात्राएं
पार्टी ,ड्रिंक,पब ,पिज़्ज़ा,बर्गर --ये तो छोटी छोटी चीज़ें हैं
चाइना के वेट मार्केट में खुश होकर सांप बिच्छू चमगादड़ खाना
ज़िंदा बिल्ली ,कुत्ते ,बन्दर,पेंगोलिन के अंग निकालना,
उन्हें जीवित ही तवे पर या नीचे से आग लगा कर भून देना
उनके हृदय विदारक आर्तनाद से निष्प्रभाव,
ये कलियुग के राक्षस हैं ये ,जीवित पशु पक्षियों को खाने वाले
पशुओं में रहने वाला वायरस ,मनुष्य का हन्ता बन गया
धरती ! माँ है हमारी ,सृष्टि के लिए उसके सभी जीव जंतु
पेड़ पौधे,एक सामान हैं, कराह रही थी यह माँ वर्षों से
याद दिला दी सृष्टि ने, दिखा दिया है हम हैं केवल आदम जात ,
कुछ नहीं हम और इत्ती सी भी नहीं है हमारी औकात !!
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