इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी ने उन दोनों के जाने के बाद प्राचार्य महोदय से कुछ बातें कीं। वास्तव में उस कार्यक्रम में इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी भी आमंत्रित थे किन्तु उन्हें गांव जाना पड़ गया था और वे काफी लेट पहुंचे थे। अब दूसरे दिन ही स्टाफ से बात हो सकती थी। प्राचार्य महोदय भी थके हुए थे अतः अनिरुद्ध चौधरी ने उनसे आज्ञा ले ली और सुबह नौ बजे ही सभी स्टाफ मेंबर्स को बुलाने के लिए कह दिया ,ताकि छात्र छात्राओं के आने से पहले अन्य लोगों से बात कर ली जाए। उन्होंने तबला पेटी वाले सज्जनों को तथा उस फोटोग्राफर को भी बुला लेने के लिए कहा जिसने इस बार कार्यक्रम के फोटो खींचे थे। इस बार पहली बार फोटो भी खिंचवाए गए थे। कस्बे के बाजार में सोनू आर्ट स्टूडियो नाम से सोनू सोलंकी ने दुकान खोल ली थी।
उधर उस शाम कमलेश्वर उस तामझाम और साज सजावट का अर्थ नहीं समझ पाया था ,और यह भी कि पापा ने सुबह कहीं जाने को मना कर दिया था तो क्या हुआ। उसने सोचा इस बार उसने किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग नहीं लिया है अतः वह शाम को कार्यक्रम देखने चला जाएगा। उससे किसी ने भी कुछ भी नहीं कहा। दूसरे दिन सुबह सात बजे सोकर उठा ,तब नीचे काफी चहल पहल सुनाई दे रही थी। तभी पापा उसके कमरे में आये। उनके हाथ में एक पैकेट था। उन्होंने उस पैकेट को कमलेश्वर की ओर बढ़ाया और बोले इसे पहन कर नीचे आ जाना। उसने पैकेट ले लिया ,उसके चेहरे पर प्रश्न छोड़ कर वे मुड़ कर चल दिए। कमलेश्वर ने पैकेट खोल कर देखा.उसमे नया ज़रीदार कुरता पजामा था, उसे आश्चर्य हुआ,उसने सोचा होगी कोई बात ,और वह नहा धो कर तैयार हो गया। नौ बजे वह नीचे आ गया। उसने रामू काका से पूछने की कोशिश की ,लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया। वह डाइनिंग टेबल पर बैठ गया। साढ़े नौ बजते ही,बाहर हॉल में कुछ लोगों के आगमन का और पिता द्वारा उनके स्वागत ,हंसी की आवाज़ सुनाई दी ,कुछ महिला स्वर भी सुनाई दिए। ------क्रमशः------
उधर उस शाम कमलेश्वर उस तामझाम और साज सजावट का अर्थ नहीं समझ पाया था ,और यह भी कि पापा ने सुबह कहीं जाने को मना कर दिया था तो क्या हुआ। उसने सोचा इस बार उसने किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग नहीं लिया है अतः वह शाम को कार्यक्रम देखने चला जाएगा। उससे किसी ने भी कुछ भी नहीं कहा। दूसरे दिन सुबह सात बजे सोकर उठा ,तब नीचे काफी चहल पहल सुनाई दे रही थी। तभी पापा उसके कमरे में आये। उनके हाथ में एक पैकेट था। उन्होंने उस पैकेट को कमलेश्वर की ओर बढ़ाया और बोले इसे पहन कर नीचे आ जाना। उसने पैकेट ले लिया ,उसके चेहरे पर प्रश्न छोड़ कर वे मुड़ कर चल दिए। कमलेश्वर ने पैकेट खोल कर देखा.उसमे नया ज़रीदार कुरता पजामा था, उसे आश्चर्य हुआ,उसने सोचा होगी कोई बात ,और वह नहा धो कर तैयार हो गया। नौ बजे वह नीचे आ गया। उसने रामू काका से पूछने की कोशिश की ,लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया। वह डाइनिंग टेबल पर बैठ गया। साढ़े नौ बजते ही,बाहर हॉल में कुछ लोगों के आगमन का और पिता द्वारा उनके स्वागत ,हंसी की आवाज़ सुनाई दी ,कुछ महिला स्वर भी सुनाई दिए। ------क्रमशः------
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