अंजुरी ने घर पहुँच कर ,किचन में देखा ,मम्मी उसके लिए सब्जी पूरी बना कर रख गई थी ,उसे ज़ोरों से भूख लग आयी थी। उसने खाना खाया और अपने कमरे में आकर आज पढ़ाये हुए नोट्स पढ़ने लगी लेकिन उसका दिल नहीं लगा। तभी दरवाज़े पर किसी ने कुण्डी खड़काई ,उसने दरवाज़ा खोला ,वह पार्वती थी। उसने मुस्कुराकर उसका स्वागत किया। पार्वती के लिए बरामदे में बिस्तर रखा हुआ था। पानी भरा लोटा गिलास भी रखा था। अंजुरी ने उसे बिस्तर बिछवा दिया और अपने कमरे में चली गई। अगले दिन सुबह सुबह उठते ही पार्वती शाम को आने की बात कह कर चली गई। अंजुरी ने अपने लिए खाना बना कर पैक किया। आज उसका मन कुछ हल्का हो गया था ,और कमलेश्वर का प्रेम फिर से मन में हिलोरें लेने लगा था। उसने कुछ अच्छा सा खाना बनाया और लंच बॉक्स में पैक भी कर लिया। वह नहा धो कर तैयार हो गई और सही समय पर ताला लगा कर महाविद्यालय की और चल पड़ी। कमलेश्वर भी पहुंचा हुआ था। वह मुस्कुराई तो कमलेश्वर भी कुछ सामान्य हुआ। तब तक अन्य प्रोफेसर्स की आवाजाही शुरू हो गई। वे भी क्लास रूम की ओर चल पड़े।
दिन सामान्य सा ही रहा। छुट्टी के बाद दोनों मंदिर पहुँच गए। देवी माँ के दर्शन के बाद अपनी तय जगह पर बैठ गए। थोड़ी देर तक दोनों ही निःशब्द बैठे रहे। अंजुरी ने लंच बॉक्स खोल लिया था। उसने कमलेश्वर से खाना खाने को कहा। कमलेश्वर ने अनुभव किया कि अंजुरी का अटूट प्रेम कहीं खो गया है। जाने कब वह उसे फिर से प्राप्त कर पायेगा। लेकिन जो कुछ भी घटित हुआ वह भी तो एक असामान्य सी घटना थी।
वह चाहता था कि अंजुरी कुछ सामान्य हो जाये और दोनों मिलकर भविष्य की कोई ठोस योजना बनायें।
सहसा अंजुरी ने पूछा ," क्या हम अपने बारे में तुम्हारे पापा से नहीं कह सकते ?
कमलेश्वर के हाथ से कौर नीचे गिर गया। पापा का नाम सुनते ही उसे ठंडा पसीना छूट गया।
क्रमशः ------------
दिन सामान्य सा ही रहा। छुट्टी के बाद दोनों मंदिर पहुँच गए। देवी माँ के दर्शन के बाद अपनी तय जगह पर बैठ गए। थोड़ी देर तक दोनों ही निःशब्द बैठे रहे। अंजुरी ने लंच बॉक्स खोल लिया था। उसने कमलेश्वर से खाना खाने को कहा। कमलेश्वर ने अनुभव किया कि अंजुरी का अटूट प्रेम कहीं खो गया है। जाने कब वह उसे फिर से प्राप्त कर पायेगा। लेकिन जो कुछ भी घटित हुआ वह भी तो एक असामान्य सी घटना थी।
वह चाहता था कि अंजुरी कुछ सामान्य हो जाये और दोनों मिलकर भविष्य की कोई ठोस योजना बनायें।
सहसा अंजुरी ने पूछा ," क्या हम अपने बारे में तुम्हारे पापा से नहीं कह सकते ?
कमलेश्वर के हाथ से कौर नीचे गिर गया। पापा का नाम सुनते ही उसे ठंडा पसीना छूट गया।
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