अंजुरी और कमलेश्वर के जीवन का यह सोपान एक ऐसा ठहराव था जहाँ से आगे जाने का पीछे कोई भी रास्ता नहीं था। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता था कि दोनों दूसरे से विलग हो रहे थे। हाँ यह अवश्य ही उस उद्दाम प्रेम की धारा का ठहराव था। अब दोनों ही गंभीर हो गए थे अपनी पढाई की ओर ,क्यूंकि यही एक मार्ग था जिससे वे अपनी मनोकामना पूर्ण कर सकते थे।
लेकिन विधाता ने इतना सरल मार्ग नहीं बनाया था उन दोनों के लिए। फिर से जनवरी आ गई। इस बार नव आगंतुक बैच के अधिकाँश लोग वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। किन्तु पिछले बैच की छात्राओं द्वारा एक नृत्य किया जाना था और पिछले वर्ष की भाँति सभी रिहर्सल में लगे हुए थे। हाँ इस बार इस कार्यक्रम में कमलेश्वर नहीं था।वह पढ़ने में जुटा हुआ था।
कमलेश्वर और अंजुरी मंथर गति से स्थिर मनःस्थिति से चल रहे थे किन्तु विधाता ने एक बड़ा सा उद्वेलन उनके निकट भविष्य में रच रखा था। अगले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम था और इसीलिए उस दिन असेंबली हॉल में सभी को उनके अगले दिन के स्टेज पर कार्यक्रम के क्रम बता दिए गए थे,साथ ही उन्हें दोपहर 12 बजे आने को कहा गया था । उस दिन अंजुरी ने कमलेश्वर से मंदिर चलने की इच्छा प्रगट की थी। अंजुरी तो तीव्र गति से सामने की झाड़ियों के पीछे पगडंडी तक पहुँच गई थी किन्तु कमलेश्वर को साइकिल से अंदर जाते हुए एक व्यक्ति ने देख लिया। यह व्यक्ति रणवीर सिंह था। वही रणवीर सिंह जिसने सिनेमा हॉल से निकलते उन्हें देखा था और विश्वनाथ सिंह से चुगली की थी। आज वह चुपके चुपके कमलेश्वर और अंजुरी दोनों को ही झाड़ियों में एक दूसरे से प्रेमालाप करते देखा और ,चुपके से ही निकल कर सीधे विश्वनाथसिंह के फार्म हाउस की ओर चल दिया।
विश्वनाथ सिंह क्रोध आवेश में थर थर कांपने लगे। रणवीर सिंह ने उन्हें एक उपाय सुझाया ,और ठन्डे दिमाग से सोचने को कहा। उसने कहा मेरी बेटी अंजली भी इकलोती और बिन माँ की बच्ची है। हाँ वह
पढ़ी लिखी नहीं है किन्तु घर के काम करने में कुशल है। विश्वनाथ सिंह को उसका सुझाव पसंद आया। रणवीर सिंह भी काफी ज़मीनो का मालिक था और उसके बाद सबकुछ उसकी बेटी का होने वाला था इस प्रकार कमलेश्वर की संपत्ति द्विगुणित हो जाएगी ,और जाति भी दोनों की एक ही थी ,उन्होंने रणवीर सिंह से हाथ मिला लिया और आनन् फानन कल ही सगाई कर देने की योजना को अंतिम रूप दे दिया।
दूसरे दिन महाविद्यालय में कार्यक्रम था और सभी उसमे व्यस्त होंगे ,दोनों एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुरा दिए। ---क्रमशः ----
लेकिन विधाता ने इतना सरल मार्ग नहीं बनाया था उन दोनों के लिए। फिर से जनवरी आ गई। इस बार नव आगंतुक बैच के अधिकाँश लोग वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। किन्तु पिछले बैच की छात्राओं द्वारा एक नृत्य किया जाना था और पिछले वर्ष की भाँति सभी रिहर्सल में लगे हुए थे। हाँ इस बार इस कार्यक्रम में कमलेश्वर नहीं था।वह पढ़ने में जुटा हुआ था।
कमलेश्वर और अंजुरी मंथर गति से स्थिर मनःस्थिति से चल रहे थे किन्तु विधाता ने एक बड़ा सा उद्वेलन उनके निकट भविष्य में रच रखा था। अगले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम था और इसीलिए उस दिन असेंबली हॉल में सभी को उनके अगले दिन के स्टेज पर कार्यक्रम के क्रम बता दिए गए थे,साथ ही उन्हें दोपहर 12 बजे आने को कहा गया था । उस दिन अंजुरी ने कमलेश्वर से मंदिर चलने की इच्छा प्रगट की थी। अंजुरी तो तीव्र गति से सामने की झाड़ियों के पीछे पगडंडी तक पहुँच गई थी किन्तु कमलेश्वर को साइकिल से अंदर जाते हुए एक व्यक्ति ने देख लिया। यह व्यक्ति रणवीर सिंह था। वही रणवीर सिंह जिसने सिनेमा हॉल से निकलते उन्हें देखा था और विश्वनाथ सिंह से चुगली की थी। आज वह चुपके चुपके कमलेश्वर और अंजुरी दोनों को ही झाड़ियों में एक दूसरे से प्रेमालाप करते देखा और ,चुपके से ही निकल कर सीधे विश्वनाथसिंह के फार्म हाउस की ओर चल दिया।
विश्वनाथ सिंह क्रोध आवेश में थर थर कांपने लगे। रणवीर सिंह ने उन्हें एक उपाय सुझाया ,और ठन्डे दिमाग से सोचने को कहा। उसने कहा मेरी बेटी अंजली भी इकलोती और बिन माँ की बच्ची है। हाँ वह
पढ़ी लिखी नहीं है किन्तु घर के काम करने में कुशल है। विश्वनाथ सिंह को उसका सुझाव पसंद आया। रणवीर सिंह भी काफी ज़मीनो का मालिक था और उसके बाद सबकुछ उसकी बेटी का होने वाला था इस प्रकार कमलेश्वर की संपत्ति द्विगुणित हो जाएगी ,और जाति भी दोनों की एक ही थी ,उन्होंने रणवीर सिंह से हाथ मिला लिया और आनन् फानन कल ही सगाई कर देने की योजना को अंतिम रूप दे दिया।
दूसरे दिन महाविद्यालय में कार्यक्रम था और सभी उसमे व्यस्त होंगे ,दोनों एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कुरा दिए। ---क्रमशः ----
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