लगभग एक घंटे बाद सभी रणवीर सिंह की जीप में बैठ कर लौट गए। पापा ने कमलेश्वर की ओर दृष्टि भी नहीं डाली ,यह जानने का प्रयास करना भी आवश्यक नहीं समझा कि ,उसके जीवन का यह महत्वपूर्ण निर्णय, जो उन्होंने लिया है, उससे वह खुश है अथवा नहीं।कमलेश्वर भी अपने कमरे में चला गया। उसका मन कर रहा था ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगे। वह पलंग पर गिर पड़ा। एक सप्ताह में यह दूसरी नाटकीय घटना घड़ी ,आवेश में अंजुरी की मांग में सिन्दूर भरना और आज अपनी इच्छा के विरुद्ध अंजलि से उसकी सगाई कर दी गई। वह स्वयं से पूछने लगा कि कौन है इन दोनों घटनाओं का उत्तर दाई ,तो उसको यही उत्तर मिला कि वह स्वयं ही उत्तरदायी है। उसे लगा उसकी चुप्पी ने सबकुछ तहसनहस कर दिया। एक ओर उसके दुस्साहस ने अंजुरी का जीवन एक प्रश्नचिन्ह बना दिया,क्यूंकि आज उस मूर्ख मंदबुद्धि अंजलि को सगाई की अंगूठी पहना कर ,उसने अंजुरी की ओर जाने वाले मार्ग को स्वयं ही बंद कर लिया था। उसे स्वयं पर क्रोध आ रहा था।
उसने गाड़ी की आवाज़ सुनी। पापा भी जा चुके थे। वह नीचे आया और मार्केट की ओर चला गया। और संयोग वश वह प्रभा से टकरा गया ,वह तेजी से महाविद्यालय जा रही थी। वह भी उस ग्रुप डांस की प्रतिभागी थी जिसमे अंजुरी भी थी। वह रुक गई ---" हो गई सगाई ?" कमलेश्वर चौंक गया ,इसे कैसे पता चला ? "तुम्हे कैसे पता चला ? उसने पूछा तो वह बोली ," रतन गढ़ में शायद ही कोई हो जिसे यह बात पता ना चली हो। "उसने क्रोधित स्वर में कहा। "अंजुरी को भी ? उसने जैसे स्वयं से प्रश्न किया ,और जैसे प्रभा ने उस प्रश्न को भी सुन लिया हो ,वह बोली ," तुम्हे क्या मतलब है अंजुरी से, दो साल तक तुमने उसकी भावनाओं के साथ जो खिलवाड़ किया है, अत्यंत निंदनीय है ,अक्षम्य है। मुझे जल्दी जाकर अंजुरी से मिलना है ,पता नहीं बेचारी पर बिजली सी गिरी होगी। वह चल दी।
एकाएक कमलेश्वर को अंजुरी की असहनीय पीड़ा का आभास हुआ। कितना प्रेम कर बैठी है उस जैसे कायर व्यक्ति से, उसके प्रेम के प्रतिदान में उसने उसे क्या दिया ?आजीवन के लिए हृदय पर एक तीक्ष्ण आघात -----क्रमशः -----
उसने गाड़ी की आवाज़ सुनी। पापा भी जा चुके थे। वह नीचे आया और मार्केट की ओर चला गया। और संयोग वश वह प्रभा से टकरा गया ,वह तेजी से महाविद्यालय जा रही थी। वह भी उस ग्रुप डांस की प्रतिभागी थी जिसमे अंजुरी भी थी। वह रुक गई ---" हो गई सगाई ?" कमलेश्वर चौंक गया ,इसे कैसे पता चला ? "तुम्हे कैसे पता चला ? उसने पूछा तो वह बोली ," रतन गढ़ में शायद ही कोई हो जिसे यह बात पता ना चली हो। "उसने क्रोधित स्वर में कहा। "अंजुरी को भी ? उसने जैसे स्वयं से प्रश्न किया ,और जैसे प्रभा ने उस प्रश्न को भी सुन लिया हो ,वह बोली ," तुम्हे क्या मतलब है अंजुरी से, दो साल तक तुमने उसकी भावनाओं के साथ जो खिलवाड़ किया है, अत्यंत निंदनीय है ,अक्षम्य है। मुझे जल्दी जाकर अंजुरी से मिलना है ,पता नहीं बेचारी पर बिजली सी गिरी होगी। वह चल दी।
एकाएक कमलेश्वर को अंजुरी की असहनीय पीड़ा का आभास हुआ। कितना प्रेम कर बैठी है उस जैसे कायर व्यक्ति से, उसके प्रेम के प्रतिदान में उसने उसे क्या दिया ?आजीवन के लिए हृदय पर एक तीक्ष्ण आघात -----क्रमशः -----
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