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गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

Dharavahik Upanyas--Anhoni---{72}

शाम को वह सही समय पर पहुंचा। तब तक मुख्य अतिथि आ चुके थे। और दर्शक गण भी अपने अपने स्थान पर बैठ चुके थे। वह भी जा बैठा। पिछली बार तिष्यरक्षिता नाटक हुआ था ,इस बार सभी छोटे छोटे हास्य नाटक थे ,यह उसे अंजुरी ने बताया था। तभी कार्यक्रम की घोषणा हुई। एक के बाद एक कार्यक्रम घोषित होते रहे ,और मंचित होते रहे ,कमलेश्वर विचार विहीन सा खोया खोया रहा। तभी अंतिम कार्यक्रम के रूप में ग्रुप डांस की घोषणा हुई जिसे सीनियर लड़कियां प्रस्तुत करने वालीं थीं वह सीधा सजग होकर बैठ गया। उसने देखा दोनों ओर तीन तीन लड़कियां थीं ,और मध्य में राधिका बनी अंजुरी थी। वह टकटकी लगाए अंजुरी को देख रहा था ,किन्तु वह हमेशा की तरह भीड़ में उसे नहीं ढूँढ रही थी। कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। वह उठ खड़ा हुआ और वापस घर जाने को निकला। तब उसने अंजुरी ले लिए जीप को आते देखा। वह घर की ओर चल दिया। 
अब हम कहानी की डोर फिर वहीं से पकड़ते हैं जहां इंस्पेक्टर अनिरुद्ध चौधरी अगले दिन आने की बात कह कर वापस चले गए थे। प्राचार्य महोदय ने सभी स्टाफ के सदस्यों को सुबह नौ बजे पहुँचने की सूचना भिजवा दी थी। सभी स्टाफ सदस्य पौने नौ बजे ही पहुँच गए थे। इंस्पेक्टर अनिरुद्ध भी पहुँच गए थे। और सभी को आश्चर्य का धक्का लगा जब जीप से अनमोल ठाकुर तथा अंजना ठाकुर भी पहुँच गए। सभी को लगा था कि अंजुरी किसी सहेली के घर चली गई होगी ,किन्तु यदि ऐसा भी था तब भी उसे रात को अथवा सुबह सुबह घर पहुँच जाना था। 
अनिरुद्ध चौधरी को स्टाफ रूम में ही सबसे एक साथ बात करना सुविधाजनक लगा। सभी वहीं जा पहुंचे ,प्राचार्य महोदय एवं ठाकुर दम्पति भी। ----क्रमशः------ 

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